पैरेंट्स की अक्सर शिकायत रहती है कि बच्चे घर पर पढ़ते नहीं हैं। ऐसे में मारने-डांटने के अलावा दूसरा कोई सॉल्यूशन नजर नहीं आता। लेकिन अगर आप बच्चे को पढ़ाने का तरीका ही बदलकर देखें, तो शायद आप खुद उसका रिजल्ट देखकर हैरान हो सकते हैं।
रोज का एक फिक्स शेड्यूल बनाएं
बच्चे के लिए पढ़ाई का एक तय समय रखना बहुत जरूरी है। ऐसा टाइम टेबल बनाएं जिसमें पढ़ाई के साथ खेलने और आराम करने का समय भी शामिल हो। जब बच्चे को पहले से पता होगा कि उसे कब पढ़ना है और कब खेलना है, तो उसके लिए अपनी रूटीन को समझना आसान होगा। शेड्यूल बनाते समय बच्चे की सुविधा का भी ध्यान रखें। उसे पूरे दिन सिर्फ पढ़ाई के लिए बैठाकर न रखें। पढ़ाई, खेल और फ्री टाइम के बीच सही बैलेंस रखें, ताकि पढ़ाई बोझ जैसी न लगे।
पढ़ाई को छोटे-छोटे टास्क में बांटें
एक साथ बहुत सारा पढ़ाने की कोशिश करने से बच्चा जल्दी थक सकता है और उसका मन पढ़ाई से हट सकता है। इसलिए पढ़ाई को छोटे-छोटे टास्क में बांटकर कराएं। पहले एक छोटा काम पूरा करवाएं और उसके बाद अगले काम पर जाएं। जब बच्चा अपना टास्क पूरा कर ले, तो उसकी तारीफ जरूर करें। आप उसे यह भी बता सकती हैं कि उसने क्या अच्छा किया। आपकी छोटी-सी तारीफ भी बच्चे को आगे पढ़ने के लिए मोटिवेट कर सकती है।
पढ़ते समय आसपास की चीजों पर दें ध्यान
बच्चा पढ़ने बैठा है तो कोशिश करें कि उसके आसपास टीवी, मोबाइल या ऐसी कोई दूसरी चीज न हो जो उसका ध्यान भटका सकती है। पढ़ाने वाली जगह भी ऐसी चुनें जहां शोर या आने-जाने की वजह से बार-बार उसका ध्यान न टूटे। सिर्फ बच्चे का मोबाइल दूर रखना ही काफी नहीं है। जब आप उसे पढ़ा रही हों, तब अपना मोबाइल भी एक तरफ रख दें। इससे बच्चे को लगेगा कि इस समय आपका पूरा ध्यान उसकी पढ़ाई पर है और वह भी ज्यादा ध्यान से पढ़ने की कोशिश करेगा।
छोटे ब्रेक और रिवार्ड रखें
लगातार पढ़ते रहने से बच्चा थक सकता है। इसलिए पढ़ाई के बीच छोटे ब्रेक रखना जरूरी है। आप करीब 20 मिनट पढ़ाने के बाद 5 मिनट का ब्रेक दे सकते हैं। इस दौरान बच्चा थोड़ा आराम कर सकता है और फिर दोबारा पढ़ाई पर ध्यान लगा सकता है। अगर बच्चा पढ़ाई के दौरान कोई काम अच्छी तरह करता है, तो उसे छोटा-सा रिवार्ड भी दिया जा सकता है। रिवार्ड के लिए कोई महंगी चीज जरूरी नहीं है। उसकी पसंद का ऐसा कोई काम चुनें जिसमें ज्यादा से ज्यादा 5 मिनट लगें। इससे पढ़ाई के बीच उसका उत्साह बना रह सकता है।
बच्चे की हर गलती पर गुस्सा ना करें
बच्चे हर चीज पहली बार में ही सीख लें ये जरूरी नहीं। कभी उन्हें किसी सवाल को समझने में ज्यादा समय लग सकता है और कभी एक ही बात कई बार समझानी पड़ सकती है। ऐसे समय में आपको अपना धैर्य बनाए रखना है। अगर बच्चा बार-बार एक ही सवाल पूछ रहा है, तो उसे डांटने या चिल्लाने के बजाय शांत होकर दोबारा समझाएं। कोशिश करें कि वह अपनी परेशानी आपसे खुलकर बता सके। अगर उसे लगेगा कि सवाल पूछने पर डांट नहीं पड़ेगी, तो वह अपनी पढ़ाई से जुड़ी बात आपसे आसानी से शेयर करेगा।
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