शार्वी महाजन अभी 14 साल की हैं और वो कैलिफोर्निया के बर्नार्डो हाइट्स मिडिल स्कूल में आठवीं कक्षा की छात्रा हैं। उन्होंने’न्यूरोड्राइव अलर्ट (NeuroDrive Alert)’ नाम का एक EEG (इलेक्ट्रोएन्सेफेलोग्राम) आधारित मशीन लर्निंग सिस्टम तैयार किया है।
कौन है शार्वी महाजन
टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) की रिपोर्ट के मुताबित शार्वी महाजन अभी 14 साल की हैं और वो कैलिफोर्निया के बर्नार्डो हाइट्स मिडिल स्कूल में आठवीं कक्षा की छात्रा हैं। उन्होंने’न्यूरोड्राइव अलर्ट (NeuroDrive Alert)’ नाम का एक EEG (इलेक्ट्रोएन्सेफेलोग्राम) आधारित मशीन लर्निंग सिस्टम तैयार किया है। यह सिस्टम ड्राइवर के दिमाग की गतिविधियों का विश्लेषण कर थकान के शुरुआती संकेतों की पहचान करता है और ड्राइवर के सोने या झपकी लेने से पहले ही उसे चेतावनी देता है, जिससे सड़क दुर्घटनाओं को रोकने में मदद मिल सकती है।
न्यूरोड्राइव अलर्ट कैसे करता है काम?
शार्वी महाजन का विकसित किया गया न्यूरोड्राइव अलर्ट सिस्टम इलेक्ट्रोएन्सेफेलोग्राफी (EEG) और मशीन लर्निंग तकनीक का इस्तेमाल करता है। यह समय के साथ ड्राइवर के मस्तिष्क की गतिविधियों (Brain Activity) में होने वाले बदलावों की लगातार निगरानी करता है। EEG तकनीक सिर (स्कैल्प) पर लगाए गए विशेष सेंसरों की मदद से मस्तिष्क के इलेक्ट्रिकल सिग्नल्स को रिकॉर्ड करती है। इसके बाद मशीन लर्निंग एल्गोरिदम इन संकेतों का विश्लेषण कर ऐसे पैटर्न पहचानता है, जो ड्राइवर में थकान या नींद आने के शुरुआती संकेत दिखाते हैं।
यह सिस्टम खासतौर पर ‘माइक्रोस्लीप’ की पहचान करने के लिए तैयार किया गया है। माइक्रोस्लीप ऐसी स्थिति होती है, जिसमें व्यक्ति कुछ सेकंड के लिए अनजाने में सो जाता है। भले ही यह अवधि बहुत कम होती है, लेकिन ड्राइविंग या भारी मशीनें चलाते समय यह बेहद खतरनाक साबित हो सकती है और गंभीर सड़क दुर्घटनाओं का कारण बन सकती है। NeuroDrive Alert ऐसे शुरुआती संकेतों का समय रहते पता लगाकर ड्राइवर को अलर्ट करता है, जिससे संभावित हादसों को रोकने में मदद मिल सकती है।
इसके अन्य फायदे
शार्वी महाजन के अनुसार, यह तकनीक केवल ड्राइविंग तक सीमित नहीं है। इसका उपयोग उन सभी परिस्थितियों में किया जा सकता है, जहां अलर्ट बने रहना बेहद जरूरी होता है। उदाहरण के लिए, भारी मशीनें चलाने वाले कर्मचारी, पायलट, ट्रेन चालक, स्वास्थ्यकर्मी या अन्य ऐसे पेशे, जहां कुछ सेकंड की भी लापरवाही गंभीर हादसे का कारण बन सकती है, वहां भी यह तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है।
क्या है 3M यंग साइंटिस्ट चैलेंज
शार्वी ने 3M यंग साइंटिस्ट चैलेंज में अपनी जगह बना ली है।यह अमेरिका की सबसे बड़ी विज्ञान प्रतियोगिता में से एक है। जिसमें कक्षा 5 से 8 तक के छात्र हिस्सा लेते हैं। प्रतियोगिता के विजेताओं को 25000 अमेरिकी डॉलर यानी करीब 21 लाख रुपये की पुरस्कार राशि और अमेरिका का टॉप यंग साइंटिस्ट का खिताब दिया जाएगा।
इन भारतीय-अमेरिकी के छात्रों ने बनाई जगह
शार्वी महाजन (कैलिफोर्निया)
राजी दोशी (कनेक्टिकट)
आरिका कुंडू (मिनेसोटा)
आयशा आसिफ (फ्लोरिडा)
नबोश्री सन्ट्रा (फ्लोरिडा)
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