(परिवर्तित डेटलाइन से)
अदन, 13 सितंबर (एपी) यमन में रविवार को संघर्ष तब और तेज हो गया, जब यमन सरकार की सेनाओं ने लाल सागर के निकट ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों पर हमले किए जबकि हूतियों ने सऊदी अरब को मिसाइलों और ड्रोन से निशाना बनाया। सऊदी अरब यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन करता है, जो हूतियों के खिलाफ लड़ रही है। यमन की सरकार ने पिछले सप्ताह एक ‘‘करारी’’ हार का सामना करने के बाद लाल सागर के तट पर और सैनिक भेजने का संकल्प व्यक्त किया है।
पिछले सप्ताह हूतियों ने एक महत्वपूर्ण बंदरगाह शहर मोखा और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य में एक द्वीप पर कब्जा कर लिया है। बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य होर्मुज जलडमरूमध्य के विकल्प के रूप में एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। इस संघर्ष के बढ़ने से खासकर सऊदी अरब के तेल बुनियादी ढांचे और लाल सागर में उसके जहाजों पर हूती हमलों की वजह से – दुनियाभर में तेल की आपूर्ति और कीमतों पर दबाव बढ़ रहा है।
इससे ईरान को अमेरिका के साथ जारी लड़ाई में बढ़त मिल सकती है। हूतियों की इस बढ़त से बाजारों में चिंता बढ़ गई है और यमन के आम नागरिकों को डर है कि देश फिर से विनाशकारी गृहयुद्ध की ओर लौट सकता है। संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि सितंबर की शुरुआत से इस गरीब देश में लड़ाई के कारण 80,000 से ज़्यादा लोग विस्थापित हुए हैं।
रात में हूतियों ने सऊदी अरब पर मिसाइलों और ड्रोन से और हमले करने का दावा किया। हूती सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल याह्या सरी ने एक बयान में दावा किया कि उन्होंने सऊदी अरब में एक सैन्य अड्डे को निशाना बनाया। उन्होंने इसका कोई सबूत नहीं दिया और यह भी नहीं बताया कि हमला कब हुआ।
सऊदी नागरिक सुरक्षा विभाग ने बताया कि यमन की सीमा के पास लाल सागर के किनारे एक मिसाइल गिरा, जिसके कारण दो लोग घायल हुए और एक मस्जिद तथा कई अन्य इमारतों को नुकसान पहुंचा। बयान में इसके लिए हूतियों को जिम्मेदार ठहराया गया। रविवार को सऊदी अरब की ओर से हूतियों को निशाना बनाकर किए गए हमले के बारे में कोई बयान नहीं आया।
हूती हाल में घोषित नाकेबंदी के तहत सऊदी तेल के बुनियादी ढांचे और जहाजों पर हमले कर रहे हैं।
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