सावन के महीने में घेवर खाने की परंपरा है और लोग इसे खाना पसंद भी करते हैं। घेवर का स्वाद मुंह में जाते ही घुल जाता है लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर घेवर आया कहां से है? आइये जानते हैं घेवर से जुड़ा हुआ इतिहास।
भारत में घेवर कहां से आया?
घेवर राजस्थानी मिठाई है और इसे सबसे पहले राजा-महाराजाओं के हलवाइयों ने बनाया था। रेगिस्तानी इलाकों में ऐसी चीजों को बनाया जाता था, जो लंबे समय तक खराब न हो और घेवर उनमें से ही एक है। घेवर मैदा, घी, चीनी और पानी से बनता है और इसलिए ये गर्मी वाली जगहों के लिए भी अच्छा होता है। जयपुर, अजमेर, जोधपुर, बाड़मेर जैसे शहरों में घेवर पहले बना और फिर धीरे-धीरे ये मिठाई पूरे भारत में मशहूर हो गई।
सावन में ही क्यों खाते हैं?
सावन के महीने में विवाहित बहन-बेटियों को मायके से भेजे जाने वाले सिंदारा (उपहार) में घेवर शामिल किया जाने लगा। तभी से घेवर को सावन में खाने और बनाने की परंपरा चली आ रही है। राजस्थान से शुरू हुई ये रीत धीरे-धीरे दिल्ली, बिहार, उत्तर प्रदेश और बाकि राज्यों में भी छा गई। सावन का महीना इसलिए भी खास है क्योंकि घेवर ऐसी मिठाई है, जिसमें जाली को बनाने के लिए मैदे में ठंडक और नमी चाहिए। ये महीना नमी वाला होता है, जिसमें घेवर आसानी से बन जाता है।
घेवर बनाने का तरीका भी है अलग
घेवर मधुमक्खी के जाले जैसा बनता है और इसे साधारण मिठाइयों की तरह नहीं बनाया जाता। इसका तरीका भी बिल्कुल अलग है। पहले मैदा, घी और बर्फ का पानी मिलाकर पतला घोल बनाया जाता है और फिर इसे ठंडा होने के लिए रखा जाता है। जब ये घोल पूरी तरह से ठंडा हो जाता है, तब इसे खौलते हुए घी में डाला जाता है और तभी मैदे में जाली पड़ती जाती है। घी में तलने के बाद घेवर को इलायची, केसर युक्त चाशनी में डुबोया जाता है।
कई प्रकार के होते हैं
घेवर दो-तीन तरीकों से बनाया जाता है। एक सादा घेवर होता है और फिर आता है रबड़ी, मलाई वाला घेवर। इसमें सादा बनाकर ऊपर से मलाई और फिर रबड़ी को लगाया जाता है। इसके बाद बादाम, पिस्ता-केसर डालकर चमचम लगाया जाता है। ज्यादातर लोग रबड़ी-मलाई वाला घेवर खाना पसंद करते हैं। बिना चाशनी वाला घेवर करीब 1 महीने तक सही रह सकता है लेकिन मलाई वाला सिर्फ 3-4 दिनों तक ही सही रहता है। अब आप राखी, तीज पर जब भी अपनी बहन-बेटी के मायके जाएं, तो घेवर जरूर लेकर जाएं। घेवर सिर्फ स्वाद ही नहीं बल्कि परंपरा का भी प्रतीक है।
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