उस दौर में कई टीचर्स फिजिक्स पढ़ाने के लिए Resnick और Halliday जैसी किताबों का इस्तेमाल करते थे। H.C. वर्मा भी पढ़ाने के लिए इसी किताब का इस्तेमाल करते थे। क्योंकि उन्हें भी यह किताब काफी पसंद थी।
कौन हैं एच.सी. वर्मा
एच.सी. वर्मा का जन्म 3 अप्रैल 1952 को बिहार के दरभंगा में हुआ था। वो ऐसे परिवार से आते हैं जहां शिक्षा को काफी महत्व दिया जाता था। उनके पिता स्कूल शिक्षक थे। उन्होंने पटना साइंस कॉलेज से B.Sc. की पढ़ाई की और इसके बाद IIT कानपुर से फिजिक्स में M.Sc. और Ph.D. की डिग्री हासिल की। इसके बाद वह पटना लौटकर पढ़ाने लगे।
फिजिक्स समझे में आ रही थी दिक्कतें
उस दौर में कई टीचर्स फिजिक्स पढ़ाने के लिए Resnick और Halliday जैसी किताबों का इस्तेमाल करते थे। H.C. वर्मा भी पढ़ाने के लिए इसी किताब का इस्तेमाल करते थे। क्योंकि उन्हें भी यह किताब काफी पसंद थी। लेकिन साल दर साल उन्होंने एक बात नोटिस किया उनके कुछ सबसे होनहार छात्र फिजिक्स पढ़ते-पढ़ते अपना आत्मविश्वास खो रहे थे। यानी उनके लिए फिजिक्श उनके लिए मुश्किलें बनती जा रही है। बस, यही बात उन्हें खटकने लगी।
किताब वैज्ञानिक रूप से मजबूत थी, लेकिन उसकी भाषा, उदाहरण और समझाने का तरीका भारतीय छात्रों के शैक्षणिक माहौल से काफी अलग था। पहली बार फिजिक्स पढ़ने वाले कई छात्रों के लिए उससे विषय की बुनियादी समझ विकसित करना मुश्किल हो रहा था। वर्मा ने महसूस किया कि समस्या छात्रों की समझ में नहीं थी, बल्कि दिक्कत उस तरीके में थी, जिसमें उन्हें फिजिक्स समझाई जा रही थी।
लिखी नई किताब
फिर क्या था उन्होंने एक बिल्कुल नई किताब तैयार की। जिसका नाम‘Concepts of Physics’ था, जो पहली बार 1992 में प्रकाशित हुई। हालांकि किताब लिखना उनके शिक्षक के तौर पर काम का हिस्सा नहीं था और न ही उन्हें यह भरोसा था कि कोई प्रकाशक उनकी किताब प्रकाशित करेगा या छात्र उसे पसंद करेंगे। इसके बावजूद उन्होंने वर्षों के अपने कक्षा के अनुभव को एक ऐसी किताब में बदलने का फैसला किया, जिसे भारतीय छात्रों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था। उनका उद्देश्य फिजिक्स को आसान बनाना नहीं, बल्कि उसे ज्यादा सहज और तार्किक तरीके से समझाना था।
क्यों अलग थी ये किताब
इस किताब को अलग बनाने वाली चीज सिर्फ इसकी सरल भाषा नहीं थी, बल्कि इसके पीछे की सोच थी। जहां कई किताबें फॉर्मूलों से शुरुआत करती थीं, वहीं वर्मा ने सवालों से शुरुआत की। वह चाहते थे कि छात्र यह समझें कि कोई चीज ‘कैसे’ काम करती है, यह जानने से पहले ‘क्यों’ काम करती है। बता दें कि रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े उदाहरण, सोच-समझकर तैयार किए गए चित्र और ऐसे सवाल, जो रटने के बजाय समझ की परीक्षा लेते थे, इन सबमें वर्मा के वर्षों के कक्षा अनुभव की झलक दिखाई देती थी।
बस, कुछ ही वर्षों में यह किताब JEE अभ्यर्थियों के बीच सबसे ज्यादा पसंद आने लगी। बाद में इसका इस्तेमाल NEET की तैयारी, ओलंपियाड प्रशिक्षण और इंजीनियरिंग की पढ़ाई में भी होने लगा। आज भी दशकों बाद देश के कई कोचिंग संस्थानों की प्रमुख किताबों की सूची में ‘Concepts of Physics’ शामिल रहती है।
पटना से IIT कानपुर तक
साल 1994 में H.C. वर्मा ने IIT कानपुर में बतौर फैकल्टी ज्वाइन किया। यहां उन्होंने दो दशक से ज्यादा समय तक पढ़ाने के साथ एक्सपेरिमेंटल न्यूक्लियर फिजिक्स में शोध किया। अपने करियर के दौरान उन्होंने 139 रिसर्च पेपर प्रकाशित किए। लेकिन देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों में से एक IIT कानपुर का हिस्सा बनने के बाद भी उनका मूल उद्देश्य नहीं बदला, फिजिक्स को आम छात्रों के लिए समझने योग्य बनाना।
IIT कानपुर में उनके रिकॉर्ड किए गए लेक्चर, डेमो और क्लासरूम सेशन आज भी इंटरनेट पर मुफ्त में उपलब्ध हैं। ऐसे छात्र भी इनका लाभ उठा रहे हैं, जो कभी IIT कानपुर के कैंपस तक नहीं पहुंच पाए।
रिटायरमेंट के बाद भी शिक्षा से जुड़े रहे
H.C. वर्मा 2017 में IIT कानपुर से रिटायर हुए, लेकिन शिक्षा से उनका रिश्ता खत्म नहीं हुआ। इसके बाद उन्होंने ‘शिक्षा सोपान’ की शुरुआत की। यह पहल उन्होंने IIT कानपुर के आसपास आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए शुरू की थी। विज्ञान और शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने 2021 में उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया।
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