ड्रैगन के सबसे बड़े दुश्मन देश की धरती पर खड़े होकर भारत ने आज एक ऐसा ऐलान कर दिया है जिसे सुनकर बल्जिंग के हुक्मरानों की नींद तक उड़ गई है। उनके पूरे रक्षा और कूटनीतिक तंत्र में खलबली मच गई है। फिलीपींस की राजधानी मनीला में जहां चीन की दादागिरी के खिलाफ रोज विरोध के सुर उठते हैं। उसी मंच से भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने चीन के तथाकथित चाणक्य वोंगी को आंखें दिखाकर वह कह डाला जो पिछले कई दशकों में कोई नहीं कह पाया। मैसेज बिल्कुल क्लियर है। या तो एलएसी पर शांति मानो वरना भारत के सब्र का इम्तिहान मत लो और यह 112 अरब डॉलर का पहाड़ जैसा व्यापार घाटा। अब ड्रैगन की यह खुली लूट किसी कीमत पर नहीं चलेगी। जरा स्थिति की गंभीरता को समझिए।
इसे भी पढ़ें: चीन ने क्यों कहा भारत का एहसान कभी नहीं भूलेंगे.. दुनिया हैरान!
मनीला जो दक्षिण चीन सागर में चीन की विस्तारवादी नीतियों के खिलाफ एक प्रमुख मोर्चा है। वहां भारत ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर ड्रैगन को एक बहुत बड़ा रणनीतिक संदेश दिया है। जब भारत और चीन के विदेश मंत्री आमने-सामने बैठे तो चीन के चाणक्य वांगी को लगा होगा कि वह हमेशा की तरह कूटनीतिक बातों से गुमराह कर देंगे। लेकिन एच शंकर ने आते ही कड़े तेवर दिखाए। उन्होंने वांगी को दो टूक चेतावनी दी कि रिश्ते तब तक सामान्य नहीं हो सकते जब तक वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी एलएसी पर शांति और स्थिरता नहीं लौटती। अक्टूबर 2024 में जो समझौते हुए थे उनका सम्मान करो वरना परिणाम भुगतने को तैयार रहो। भारत अब दबाव की राजनीति के आगे रत्ती भर भी झुकने वाला नहीं है। लेकिन असली वार तो इकोनॉमी के मोर्चे पर हुआ जिसने चीन की कमर ही तोड़ दी।
इसे भी पढ़ें: भयंकर मारपीट के बाद फिर से चीन-फिलीपींस ने मचाया बवाल, राजदूतों को किया तलब!
भारत और चीन के बीच व्यापार घाटा बढ़कर 112.16 अरब डॉलर के खौफनाक स्तर को छू चुका है। चीन अपनी दगाबाजी दिखाते हुए अक्सर भारत को क्रिटिकल टेक्नोलॉजी, मशीनरी और रेयर अर्थ एलिमेंट का निर्यात रोक देता है। यानी व्यापार के मैदान में पूरी बेशर्मी से एकाधिकार जमाने की कोशिश करता है। लेकिन इस बार ड्रैगन की दाल नहीं गली। एस जयशंकर ने चीनी विदेश मंत्री के सामने चीनी बाजार में भारतीय उत्पादों को निष्पक्ष फेयर एंट्री देने की कसमसाती मांग रख दी। उन्होंने साफ कह दिया है कि ग्लोबल उथल-पुथल के इस दौर में सप्लाई चैन में हेराफेरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मैरिटाइम ट्रेड और इंटरनेशनल लॉस का उल्लंघन अब नहीं चलेगा। मनीला के इस मंच से भारत ने दुनिया को बता दिया है कि नया भारत अपनी शर्तों पर बात करता है। चाणक्य बनने का ढोंग करने वाले वोंगी को जयशंकर ने साफ बता दिया है कि कूटनीति के रण में भारत हर मोर्चे पर भारी पड़ना जानता है। लद्दाख की सरहद से लेकर व्यापार की महाजंग तक भारत का रुख बिल्कुल चट्टान की तरह अडिंग है। बीजिंग अलर्ट हो चुका है और अब उसे यह बात माननी ही पड़ेगी।
Discover more from Hindi News Blogs
Subscribe to get the latest posts sent to your email.