पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। दुनिया की प्रमुख निवेश संस्था गोल्डमैन सैक्स ने चेतावनी दी है कि यदि होरमुज़ स्ट्रेट में तेल आपूर्ति में रुकावट लंबे समय तक बनी रहती है तो ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत इस वर्ष की अंतिम तिमाही में 120 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच सकती है। हालांकि संस्था ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह उसका मुख्य अनुमान नहीं है, बल्कि जोखिम की स्थिति में संभावित परिदृश्य है।
बता दें कि हाल के सप्ताहों में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ा दी है। इसके साथ ही यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों की ओर से सऊदी अरब के जहाजों की नाकेबंदी की धमकी ने भी बाजार की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे हालात में लाल सागर के रास्ते होने वाला तेल निर्यात और अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।
गोल्डमैन सैक्स के विश्लेषकों ने 20 जुलाई की अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और फारस की खाड़ी से तेल आपूर्ति में कमी के कारण कच्चे तेल की कीमतों में फिर तेजी देखने को मिली है। मौजूद जानकारी के अनुसार मौजूदा समय में फारस की खाड़ी से होने वाला तेल प्रवाह युद्ध से पहले के स्तर के 45 प्रतिशत से भी नीचे पहुंच गया है, जिससे वैश्विक बाजार में आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी है।
हालांकि संस्था का आधार अनुमान कुछ अलग है। विश्लेषकों का कहना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव धीरे-धीरे कम होता है तो इस वर्ष की अंतिम तिमाही में ब्रेंट कच्चे तेल की औसत कीमत करीब 80 डॉलर प्रति बैरल रह सकती है। वहीं अगले वर्ष यह औसत 75 डॉलर प्रति बैरल तक आ सकता है। इसके बावजूद संस्था का मानना है कि कीमतों में तेजी का जोखिम अभी भी बना हुआ है।
गौरतलब है कि होरमुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में से एक है। यहां से दुनिया के बड़े हिस्से को कच्चे तेल की आपूर्ति होती है। यदि इस मार्ग पर लंबे समय तक बाधा बनी रहती है और साथ ही लाल सागर में भी जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है।
विश्लेषकों का यह भी कहना है कि दूसरी तिमाही के दौरान वैश्विक तेल भंडार में कमी आई है। इससे बाजार पहले की तुलना में अधिक संवेदनशील हो गया है। हालांकि चीन द्वारा कच्चे तेल के आयात में कुछ नरमी आने और मांग में लचीलापन रहने से कीमतों में संभावित उछाल कुछ हद तक सीमित रह सकता है।
मौजूद जानकारी के अनुसार गोल्डमैन सैक्स ने निवेशकों को यूरोप के डीजल बाजार में दीर्घकालिक निवेश पर भी विचार करने की सलाह दी है। संस्था का मानना है कि डीजल की आपूर्ति पहले से ही दबाव में है। इसके अलावा रूस की तेल शोधक इकाइयों पर यूक्रेन के हमले, समुद्री तूफानों का खतरा, अत्यधिक गर्मी और रिफाइनरी के रखरखाव में देरी जैसे कारण भी डीजल बाजार को प्रभावित कर सकते हैं।
फिलहाल अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट कच्चा तेल करीब 88.54 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। गौरतलब है कि इसी वर्ष अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के शुरुआती दौर में इसकी कीमत 126 डॉलर प्रति बैरल से भी ऊपर पहुंच गई थी। ऐसे में आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की स्थिति, तेल आपूर्ति और भू-राजनीतिक घटनाक्रम ही यह तय करेंगे कि कच्चे तेल की कीमतें किस दिशा में आगे बढ़ती है।
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