श्रीलंका के मुख्य कोच गैरी कर्स्टन चाहते हैं कि आगे आने वाली सीरीज़ में उसी तरह की पिचें तैयार की जाएं, जैसा भारत और श्रीलंका के बीच खेली गई सीरीज़ के दौरान थीं। ऐसी पिचें जिनमें तेज गेंदबाजों के लिए भी मदद हो।
सिर्फ स्पिनरों के लिए पिचें ना तैयार हों
कर्स्टन का मानना है कि स्पोर्टिंग विकेट ही ऐसे क्रिकेटर तैयार करती हैं, जिनमें टेस्ट क्रिकेट में सफल होने के लिए ज़रूरी कौशल और धैर्य विकसित होता है। कर्स्टन ने कहा, “मैं इस बात का बड़ा समर्थक हूं कि हम सिर्फ़ स्पिनरों के लिए पिचें तैयार न करें। हम ऐसी पिचें चाहते हैं जहां हमारे तेज़ गेंदबाज़ भी हमें मैच जिता सकें। इसी तरह से एक अच्छी क्रिकेट टीम विकसित होती है। हर तरह की परिस्थितियों में खेलकर टीमें बेहतर बनती हैं। टेस्ट सीरीज़ के लिए तैयार की गई दोनों पिचों से मैं बेहद प्रभावित था। इन पिचों पर नतीजा हासिल करने के लिए आपको मेहनत करनी पड़ती है। ये उस तरह की पिचें नहीं थीं, जहां तुरंत नतीजा निकल जाए।” उन्होंने आगे कहा- “हम चाहते थे कि हमारे बल्लेबाज़ बल्लेबाज़ी कर सकें। स्पिनरों को मेहनत करनी पड़े और तेज़ गेंदबाज़ भी खेल में बने रहें। गॉल टेस्ट की दूसरी पारी में हमारे तेज़ गेंदबाज़ों ने दस में से सात विकेट लिए थे। यह देखकर मैं बेहद उत्साहित हूं कि हमारे तेज़ गेंदबाज़ खेल में प्रभाव डाल रहे हैं और मैं इसे आगे और विकसित करना चाहता हूं।”
असिता फर्नोंडो वर्ल्ड क्लास गेंदबाज हैं
कर्स्टन ने विशेष रूप से असिता फ़र्नांडो की तारीफ की, जो पिछले कई वर्षों से श्रीलंका के मुख्य तेज़ गेंदबाज़ रहे हैं। 29 वर्षीय फ़र्नांडो के सामने अभी लंबा करियर है, लेकिन सवाल यह है कि उन्हें दूसरे छोर से कितना समर्थन मिलेगा। श्रीलंका के दूसरे प्रमुख तेज़ गेंदबाज़ लाहिरु कुमारा ने इस सीरीज़ में 57.33 की औसत से सिर्फ़ तीन विकेट लिए। कर्स्टन ने असिता के बारे में कहा “वह विश्व स्तरीय गेंदबाज़ हैं और इस सीरीज़ में भी उन्होंने शानदार गेंदबाज़ी की। वह अपने खेल के शीर्ष स्तर पर हैं। लेकिन हमें उनके लिए और मदद की ज़रूरत है, हम सिर्फ़ उन्हीं पर निर्भर नहीं रह सकते। आने वाले समय में हम इस बात पर काफ़ी काम करेंगे कि 20 विकेट कैसे लिए जाएं और केवल स्पिन पर निर्भर न रहें।”
दिनुशा द्वारा खेली गई टेस्ट इतिहास की महान पारी
हालांकि, इस सीरीज़ के सबसे बड़े सितारे सोनल दिनुशा रहे। कर्स्टन ने एसएससी में पांचवें दिन उनके संघर्षपूर्ण शतक को श्रीलंका के टेस्ट इतिहास की महान पारियों में से एक बताया। कर्स्टन ने कहा, “चौथे और पांचवें दिन उन्होंने जो पारी खेली, वह श्रीलंका के टेस्ट इतिहास में सबसे बेहतरीन बचावों में से एक मानी जाएगी। यह अलग बात है कि उन्होंने पहली पारी में भी शतक बनाया था। इसके बावजूद फॉलोऑन के बाद मुश्किल परिस्थिति में उन्होंने जो किया, वह शानदार था।” उन्होंने आगे कहा “मुझे लगता है कि नंबर छह पर बल्लेबाज़ी करना कभी आसान नहीं होता क्योंकि अक्सर आपको दबाव की स्थिति में आना पड़ता है। वेस्टइंडीज़ दौरे पर जब मैंने उन्हें देखा, तो पाया कि वह मुश्किल परिस्थितियों में और बेहतर खेलते हैं। मुझे उनका टेस्ट क्रिकेट खेलने का तरीक़ा बहुत पसंद है। वह खेल के बारे में सोचते हैं, अपनी ताक़त के मुताबिक खेलते हैं और बेहद समझदार क्रिकेटर हैं। उन्हें पता होता है कि गेंदबाज़ उनके ख़िलाफ़ क्या योजना बना रहे हैं और फिर वह अपने कौशल का इस्तेमाल कर उसे निष्प्रभावी कर देते हैं।”
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