फिल्म ‘पति पत्नी और वो 2’ को लेकर आयुष्मान खुराना और डायरेक्टर मुदस्सर अजीज ने दैनिक भास्कर से बातचीत की। दोनों ने शादीशुदा रिश्तों में भरोसे, शक, रेड फ्लैग-ग्रीन फ्लैग और आज के रिलेशनशिप्स की उलझनों पर अपनी राय रखी। आयुष्मान ने निजी जिंदगी के अनुभव साझा किए, वहीं मुदस्सर ने फैमिली एंटरटेनर फिल्मों के प्रति अपने आकर्षण पर बात की। पढ़िए बातचीत के खास अंश… सवाल: ‘पति पत्नी और वो 2’ की कहानी इस बार कितनी अलग है? जवाब/ आयुष्मान खुराना: यह कोई भारी-भरकम सोशल मैसेज वाली फिल्म नहीं है। कहानी कन्फ्यूजन और गलतफहमियों के इर्द-गिर्द घूमती है। मेरा किरदार प्रजापति पांडे सीधा इंसान है, लेकिन कुछ परिस्थितियों में पत्नी को उस पर शक होने लगता है। वहीं से फिल्म में मजेदार ट्विस्ट शुरू होते हैं। सवाल: रिश्तों और भरोसे को लेकर फिल्म क्या कहना चाहती है? जवाब/ मुदस्सर अजीज: मैंने बचपन से घर में एक बात सुनी है कि शक का इलाज लुकमान हकीम के पास भी नहीं था। कई बार जो दिखता है, जरूरी नहीं वही सच हो। रिश्तों में भरोसा सबसे अहम चीज है और यही फिल्म की मूल भावना है। सवाल: अगर रिश्ते में गलतफहमी या शक आ जाए तो क्या करना चाहिए? जवाब/ आयुष्मान खुराना: सबसे जरूरी है यह समझना कि दोनों लोग एक-दूसरे के खिलाफ नहीं, बल्कि एक ही टीम में हैं। अगर दोनों रिश्ते को संभालना चाहें तो हर परेशानी का हल निकल सकता है। लेकिन ईगो बीच में आ जाए तो मुश्किलें बढ़ने लगती हैं। सवाल: शादी और रिश्तों पर फिल्में बनाने में आपकी खास दिलचस्पी क्यों रहती है? जवाब/ मुदस्सर अजीज: वैवाहिक जीवन अपने आप में दिलचस्प होता है। दो अलग सोच वाले लोग साथ जिंदगी बिताने की कोशिश करते हैं, इसलिए छोटी-छोटी नोकझोंक स्वाभाविक है। वहीं से कहानियां और कॉमेडी निकलती हैं। सवाल: क्या कॉलेज के दिनों में कभी लव ट्रायंगल जैसी स्थिति का सामना किया? जवाब/ आयुष्मान खुराना: नहीं, मेरे साथ ऐसा कुछ खास नहीं हुआ। मैं ऑल बॉयज स्कूल और कॉलेज में पढ़ा हूं। बाद में मास कम्युनिकेशन में लड़कियां ज्यादा थीं और वहीं मेरी पत्नी से मुलाकात हुई। सवाल: रेड फ्लैग और ग्रीन फ्लैग जैसी बातें कब समझ में आने लगीं? जवाब/ आयुष्मान खुराना: हर इंसान समय के साथ सीखता है। शुरुआत में लोग खुद पर ज्यादा फोकस करते हैं और रिश्तों को पूरी तरह नहीं समझ पाते। अनुभव के साथ इंसान मैच्योर होता जाता है। कोई भी शुरू से परफेक्ट नहीं होता। सवाल: किसी को-स्टार में सबसे बड़ा ग्रीन फ्लैग क्या मानते हैं? जवाब/ आयुष्मान खुराना: मेरे लिए टैलेंट से ज्यादा इंसानियत मायने रखती है। कोई कितना भी अच्छा कलाकार हो, अगर उसका व्यवहार अच्छा नहीं है तो बात अधूरी लगती है। सवाल: क्या डायरेक्टर के तौर पर एक्टर्स में कोई रेड फ्लैग नजर आता है? जवाब/ मुदस्सर अजीज: मैं रेड फ्लैग ढूंढने में विश्वास नहीं करता। मेरा काम कलाकार की कमियां निकालना नहीं, बल्कि उसका सबसे अच्छा रूप स्क्रीन पर लाना है। सवाल: फिल्म में वामिका गब्बी, सारा अली खान और रकुल प्रीत सिंह जैसी तीन अभिनेत्रियों के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा? जवाब/ मुदस्सर अजीज: बहुत आसान और मजेदार रहा। सभी कलाकार प्रोफेशनल थे। सेट पर माहौल पॉजिटिव रहा और सबके बीच अच्छी दोस्ती बन गई। सवाल: रिश्तों में सबसे बड़ा बहाना कौन-सा लगता है- “मैं रास्ते में हूं” या “वो सिर्फ दोस्त हैं”? जवाब/ आयुष्मान खुराना: दोनों बातें सच भी हो सकती हैं और झूठ भी। मेरे मामले में “मैं रास्ते में हूं” ज्यादा इस्तेमाल होता है, क्योंकि शूटिंग के चलते अक्सर लेट हो जाता हूं। सवाल: पार्टनर की कौन-सी आदत सबसे ज्यादा परेशान करती है? जवाब/ आयुष्मान खुराना: जब सामने वाला पूछे कि “क्या सोच रहे हो?” और सच में दिमाग खाली हो। मुझे लगता है ज्यादातर लड़के इस स्थिति से गुजरते हैं। सवाल: रिश्ते को संभालने और बिगाड़ने वाली सबसे अहम चीज क्या है? जवाब/ आयुष्मान खुराना: स्पेस देना जरूरी है। इंसान को उसकी आजादी मिलनी चाहिए, लेकिन जरूरत से ज्यादा दूरी रिश्ते में गैप ला सकती है। बैलेंस जरूरी है। सवाल: अगर इंडस्ट्री में किसी से रिलेशनशिप सलाह लेनी हो तो किससे लेंगे? जवाब/ आयुष्मान खुराना: हर रिश्ता अलग होता है, इसलिए कोई एक फॉर्मूला सब पर लागू नहीं हो सकता। दोस्त सलाह दे सकते हैं, लेकिन रिश्ते की असली समस्याएं कपल्स को खुद सुलझानी पड़ती हैं। सवाल: खुद को शांत रखने के लिए क्या करते हैं? जवाब/ आयुष्मान खुराना: म्यूजिक मुझे सबसे ज्यादा रिलैक्स करता है। नए गाने और कलाकारों को सुनना पसंद है। इसके अलावा कविताएं पढ़ना अच्छा लगता है। सवाल: मुदस्सर जी आप तनाव कैसे कम करते हैं? जवाब/ मुदस्सर अजीज: मैं लिखता हूं। जरूरी नहीं कि हर चीज लोगों तक पहुंचे, लेकिन अपने विचार कागज पर उतारने से सुकून मिलता है। सवाल: एक्शन फिल्मों के बीच फैमिली कॉमेडी की कितनी अहमियत है? जवाब/ आयुष्मान खुराना: अच्छी कॉमेडी और अच्छी लव स्टोरी कभी पुरानी नहीं पड़ती। जब पूरा परिवार साथ बैठकर हंसता है, वही सिनेमा का सबसे खूबसूरत एहसास होता है। सवाल: इस तरह की फैमिली एंटरटेनर फिल्मों की प्रेरणा कहां से मिली? जवाब/ मुदस्सर अजीज: मैं बचपन से ‘अंगूर’, ‘चुपके-चुपके’, ‘आंखें’, ‘वेलकम’ और ‘नो एंट्री’ जैसी फिल्में देखता आया हूं। ये ऐसी फिल्में हैं जिन्हें लोग बार-बार देखकर भी एन्जॉय करते हैं। उसी तरह का मनोरंजन ‘पति पत्नी और वो 2’ में देने की कोशिश की है।
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