न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने देर रात जारी अंतरिम आदेश में कहा कि इस स्तर पर अदालत 14 सितंबर को होने वाले चयन ट्रायल में फोगाट को हिस्सा लेने की अनुमति देने के लिए पात्रता मानदंड में अंतरिम छूट देने के पक्ष में नहीं है।
उच्च न्यायालय ने यह आदेश पहलवान फोगाट की उस याचिका को खारिज करते हुए दिया जिसमें उन्होंने मातृत्व अवकाश से लौटने के बाद 2026 सीनियर विश्व चैंपियनशिप के महिला चयन ट्रायल में हिस्सा लेने की अनुमति मांगी थी।
अदालत ने कहा कि गर्भावस्था, बच्चे के जन्म और प्रसव के बाद स्वास्थ्य लाभ से जुड़ी फोगाट की परिस्थितियों पर नीति की वैधता की जांच करते समय विचार करना जरूरी होगा। हालांकि, अंतरिम चरण में केवल इन परिस्थितियों के आधार पर उन्हें पात्रता मानदंड के विपरीत चयन ट्रायल में हिस्सा लेने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
अदालत ने कहा कि ”नीति की वैधता पर पहले फैसला किए बिना केवल याचिकाकर्ता को ऐसी अंतरिम राहत देना उन समान परिस्थितियों वाले खिलाड़ियों के साथ असमान व्यवहार का कारण बन सकता है जो इस अदालत के समक्ष नहीं हैं।”
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने सर्कुलर की वैधता या लंबित अनुशासनात्मक कार्यवाही के गुण-दोष पर कोई अंतिम राय व्यक्त नहीं की है और फिलहाल अंतरिम राहत देने के पक्ष में नहीं है।
फोगाट ने लंबित मुख्य याचिका में दायर आवेदन के जरिए सात सितंबर को डब्ल्यूएफआई द्वारा जारी उस सर्कुलर पर रोक लगाने की भी मांग की थी जिसमें 14 सितंबर को यहां इंदिरा गांधी स्टेडियम में होने वाले चयन ट्रायल के लिए पात्रता मानदंड तय किए गए हैं।
यह नया आवेदन उस मुख्य याचिका में दायर किया गया था, जिसमें फोगाट ने गर्भावस्था और मातृत्व अवकाश के बाद प्रतिस्पर्धी खेलों में लौटने वाली महिला खिलाड़ियों के लिए निष्पक्ष और व्यवस्थित व्यवस्था बनाने की मांग की है।
आवेदन में उन्होंने सर्कुलर पर रोक लगाने की मांग की थी क्योंकि इसके चलते वह 24 अक्टूबर से एक नवंबर तक कजाखस्तान के अस्ताना में होने वाली चैंपियनशिप के चयन ट्रायल में हिस्सा नहीं ले पा रही हैं।
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