आज (बुधवार, 20 मई) ज्येष्ठ अधिक मास का पहला विनायकी चतुर्थी व्रत है। ये व्रत भगवान गणेश की कृपा पाने और घर में सुख-समृद्धि बनाए रखने की कामना से किया जाता है। अधिक मास, बुधवार और चतुर्थी का योग होने से इस व्रत और पूजा का महत्व और भी बढ़ गया है, क्योंकि चतुर्थी तिथि और इस दिन के स्वामी भगवान गणेश हैं। अधिक मास में भगवान विष्णु की विशेष पूजा की जाती है, इसलिए इस योग में विष्णु जी का अभिषेक भी करना चाहिए। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, चतुर्थी तिथि पर गणेश जी के लिए व्रत करने की परंपरा इसलिए हैं, क्योंकि इसी तिथि पर भगवान गणपति अवतरित हुए थे। गणेश पुराण के अनुसार इस दिन व्रत करने से घर में सुख-समृद्धि बढ़ती है। हिन्दी पंचांग के अनुसार हर महीने दो बार चतुर्थी व्रत किया जाता है। अमावस्या के बाद आने वाली शुक्लपक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहते हैं और पूर्णिमा के बाद आने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहते हैं। विनायकी चतुर्थी पर सुबह स्नान के बाद घर के मंदिर में गणेश पूजा और व्रत करने का संकल्प लिया जाता है। इस व्रत में भगवान गणेश की पूजा की जाती है। दिनभर नियम से व्रत रखते हुए शाम को भी गणेश जी की पूजा की जाती है। इस तिथि चंद्र उदय के बाद दर्शन पूजन करने की परंपरा है। जो लोग भूखे नहीं रह पाते हैं, वे एक समय फलाहार कर सकते हैं। मौसमी फल खा सकते हैं। फलों का रस और दूध पी सकते हैं। ऐसे कर सकते हैं गणेश जी की पूजा इस साल 59 दिन का है ज्येष्ठ मास आज ज्येष्ठ पुरुषोत्तम मास की चौथी तिथि है। ज्येष्ठ अधिक मास 15 जून तक रहेगा, इसके बाद ज्येष्ठ मास का शुक्ल पक्ष शुरू होगा, जो कि 29 जून तक रहेगा। अधिक मास में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, जनेऊ संस्कार जैसे मांगलिक कार्यों के लिए मुहूर्त नहीं रहते हैं। इस बार ज्येष्ठ में अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) होने से ये महीना 59 दिनों का है। ज्येष्ठ महीना 2 मई से शुरू हुआ है। अधिक मास में भगवान विष्णु और उनके अवतारों की पूजा खासतौर पर की जाती है। इस महीने को विष्णु जी के नाम पुरुषोत्तम से भी जाना जाता है। पुरुषोत्तम मास में तीर्थ स्नान, मंदिरों में दर्शन-पूजन, सत्संग, मंत्र जप, दान-पुण्य, पूजन आदि शुभ काम किए जाते हैं। अंग्रेजी कैलेंडर में लीप ईयर होता है और हिन्दी पंचांग में अधिक मास। लीप ईयर में सिर्फ एक दिन बढ़ता है, जबकि अधिक मास से हिन्दी वर्ष में पूरा एक महीना बढ़ जाता है। दरअसल, ये सौर वर्ष और चंद्र वर्ष में अंतर की वजह से होता है।
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