भारतीय सिनेमा के जाने-माने और अनुभवी अभिनेता प्रदीप रावत का कैंसर से लंबी लड़ाई के बाद 74 वर्ष की आयु में निधन हो गया। बी.आर. चोपड़ा के ऐतिहासिक धारावाहिक ‘महाभारत’ में अश्वत्थामा की भूमिका से घर-घर में लोकप्रिय हुए प्रदीप रावत ने हिंदी के अलावा दक्षिण भारतीय सिनेमा में भी विलेन के रूप में अपनी अमिट छाप छोड़ी। उनके निधन की खबर से पूरे फिल्म उद्योग में शोक की लहर दौड़ गई है। उनके निधन की खबर सबसे पहले एक्टर यशपाल शर्मा ने दी। उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक इमोशनल पोस्ट के ज़रिए अपने पुराने साथी को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने लिखा, “प्रदीप रावत, हमारे ‘लगान’ के देवा और ‘गजनी’ के विलेन, भगवान आपकी आत्मा को शांति दे।”
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प्रदीप रावत के मैनेजर सिद्धार्थ तिवारी ने बाद में पुष्टि की कि कैंसर दोबारा होने के बाद एक्टर का इलाज चल रहा था। HT सिटी से बात करते हुए तिवारी ने कहा, “वह कैंसर से पीड़ित थे और बीमारी दोबारा लौट आई थी। कुछ घंटे पहले ही उनका निधन हुआ है।” उन्होंने यह भी बताया कि रावत एक महीने से ज़्यादा समय से अस्पताल में भर्ती थे। उनके परिवार में उनकी पत्नी और बेटा हैं।
‘महाभारत’ से लेकर बड़े पर्दे तक
प्रदीप रावत का एक्टिंग करियर चार दशकों से ज़्यादा लंबा रहा, जिसमें उन्होंने हिंदी, तेलुगु, तमिल, कन्नड़, मलयालम, बंगाली, भोजपुरी, नेपाली और मराठी सिनेमा में काम किया। हालांकि उन्होंने 80 के दशक की शुरुआत में फिल्मों में डेब्यू किया था, लेकिन बी.आर. चोपड़ा की मशहूर टीवी सीरीज़ ‘महाभारत’ में अश्वत्थामा के किरदार ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई। दर्शकों की एक पूरी पीढ़ी के लिए, रावत उस खूंखार योद्धा की पहचान बन गए थे, इससे पहले कि वे भारतीय सिनेमा के सबसे जाने-माने विलेन के तौर पर अपनी जगह बनाते।
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रावत ने इंडस्ट्री के सबसे भरोसेमंद कैरेक्टर एक्टर्स में से एक के तौर पर अपनी खास पहचान बनाई। उन्होंने आशुतोष गोवारिकर की ऑस्कर-नॉमिनेटेड फिल्म ‘लगान’ (2001) में आमिर खान के साथ काम किया, जिसमें उन्होंने देवा सिंह का किरदार निभाया था। इसके बाद उन्होंने ए.आर. मुरुगाडोस की तमिल ब्लॉकबस्टर ‘गजनी’ (2005) में अपने करियर का एक यादगार किरदार निभाया। बेरहम ‘गजनी धर्मात्मा’ के तौर पर उनके काम को इतनी ज़्यादा तारीफ़ मिली कि 2008 में बनी हिंदी रीमेक में भी उन्हें ही चुना गया और उन्होंने आमिर खान के साथ वही किरदार दोबारा निभाया। उनके करियर में एक बड़ा मोड़ S.S. राजामौली की फ़िल्म ‘सये’ (2004) से आया, जो उनकी पहली तेलुगु फ़िल्म थी। इसमें भिक्षु यादव के किरदार के लिए उन्हें काफ़ी तारीफ़ मिली।
सालों तक प्रदीप रावत ने कई फ़िल्म इंडस्ट्रीज़ में लगातार सफलता हासिल की। उनकी फ़िल्मों की लिस्ट में सरफ़रोश, द हीरो: लव स्टोरी ऑफ़ ए स्पाई, स्टालिन, राउडी राठौर, वीरम, 1: नेनोक्कडिने, लौकियम, नेनु शैलजा, सर्राइनोडु, नेने राजू नेने मंत्री, आयिरथिल इरुवर, मार्केट राजा MBBS और मिस मैच जैसी फ़िल्में शामिल हैं।
हाल के सालों में भी यह अनुभवी एक्टर एक्टिव रहे और वाल्टेयर वीरय्या, गुलु गुलु और छावा जैसी फ़िल्मों के साथ-साथ मराठी और नेपाली सिनेमा के प्रोजेक्ट्स में भी नज़र आए।
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