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देश में पहली बार एक दिल को ट्रांसप्लांटेशन के लिए वंदेभारत एक्सप्रेस ट्रेन से सूरत से अहमदाबाद लाया गया। इस हार्ट ट्रांसप्लांटेशन के लिए पहले हॉस्पिटल से स्टेशन तक ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। इसके बाद हार्ट को अहमदाबाद के एक कार्डियक टीचिंग अस्पताल में ट्रांसप्लांट के लिए पहुंचाया गया।
रेलवे के मुताबिक शुक्रवार को हुए इस पूरे घटनाक्रम में सूरत से अहमदाबाद की 250km की दूरी तय करने में वंदेभारत ने करीब 217 मिनट का वक्त लिया।
स्टेशन तक बनाया ग्रीन कॉरिडोर, 2 तस्वीरें…

डोनर का दिल स्पेशल बॉक्स और विशेष घोल में रखकर लाया गया।

स्टेशन से अहमदाबाद के हॉस्पिटल तक एक बार फिर ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया।
4 एजेंसियों की मदद से बना ग्रीन कॉरिडोर
रेलवे, गुजरात पुलिस, आरपीएफ और मेडिकल टीमों के बीच मजबूत तालमेल से दिल को हॉस्पिटल तक पहुंचाने के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। अहमदाबाद स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 1 से यूएन मेहता इंस्टीट्यूट तक हार्ट को तेजी से पहुंचाने के लिए RPF और गुजरात पुलिस ने ग्रीन कॉरिडोर तैयार किया था।
अहमदाबाद के मंडल रेल प्रबंधक (DRM) वेद प्रकाश ने इसे भारतीय रेलवे के लिए गर्व का पल बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय रेलवे ने पहली बार वंदेभारत एक्सप्रेस ने हार्ट को पहुंचाकर इतिहास बना दिया है।

मुख्यमंत्री बोले- ऑर्गन ट्रांसप्लांटेशन में हर सेकंड कीमती
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि ऑर्गन ट्रांसप्लांटेशन की प्रक्रिया में हर सेकंड कीमती होता है। वंदे भारत की तेज रफ्तार के कारण ही यह प्रयास संभव हो सका। मुख्यमंत्री ने अस्पताल के डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ को अबतक 77 सफल हार्ट ट्रांसप्लांट के लिए बधाई दी।
हार्ट ट्रांसप्लांटेशन से जुड़ा नॉलेज फैक्ट
- दिल को निकालने के बाद उसे लगभग 4°C तापमान पर रखा जाता है। पहले उसे विशेष ठंडे सॉल्यूशन से दिल में बनी खून लाने-ले जाने वाली नलियों को धोया जाता है, जिससे खून निकल जाता है।
- ऐसा करने से दिल की ऑक्सीजन की जरूरत बहुत कम हो जाती है। इसके बाद हृदय को उसी घोल से भरे स्टरल बैग में रखकर बर्फ वाले कंटेनर में अस्पताल पहुंचाया जाता है।
- आमतौर पर 6 घंटे के भीतर ट्रांसप्लांटेशन सबसे सुरक्षित माना जाता है। समय बढ़ने पर इसके सफल होने की संभावना कम हो सकती है।
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