अयोध्या राम मंदिर में आए चढ़ावे में 7 करोड़ रुपए की चोरी के दावे पर प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने मंदिर ट्रस्ट से रिपोर्ट मांगी है। भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने मंगलवार को प्रधानमंत्री को लेटर लिखकर CBI से जांच कराने की मांग की थी।
इधर, भवन निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने मंगलवार को ट्रस्ट के सदस्यों के साथ बैठक की थी। राम मंदिर परिसर के एक बंद कमरे में करीब 4 घंटे तक बैठक चली। सूत्रों के मुताबिक, बैठक में चढ़ावे की राशि, उसके उपयोग और लेखा-जोखा जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने मंगलवार को फिर से राम मंदिर में कथित चोरी का मुद्दा उठाया। अखिलेश ने सरकार से 11 सवाल पूछे। उन्होंने कहा- आखिर देश की सनातन आस्था से खिलवाड़ करने वालों के पीछे कौन लोग हैं? चढ़ावे में कथित चोरी करने वालों को कौन बचा रहा है? इस पूरे मामले के तार किन लोगों से जुड़े हैं और इसकी जिम्मेदारी किसकी है?
दरअसल, सपा सरकार में मंत्री रह चुके पवन पांडेय ने रविवार, 7 जून को दावा किया था कि राम मंदिर से 5 से साढ़े 7 करोड़ रुपए तक की चोरी की गई है। अखिलेश ने भी कहा था कि मामले पर सरकार की चुप्पी संदिग्ध है। कोर्ट को मामले का संज्ञान लेना चाहिए।
इस पर ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय ने इस पर सफाई दी थी। उन्होंने कहा था कि ट्रस्ट का समय-समय पर आंतरिक ऑडिट होता है। इसमें ट्रस्ट और SBI बैंक के प्रतिनिधि शामिल रहते हैं। आजकल वही काम रहा है। अभी तक ऐसी कोई भी बात सामने नहीं आई है।
भवन निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने मंगलवार को अफसरों के साथ 4 घंटे तक बैठक की थी।
भाजपा नेता ने लेटर लिखकर कहा था- CBI, ED से जांच कराई जाए अयोध्या के भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने लेटर लिखा था- राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में चढ़ावे, दान और मंदिर प्रशासन से जुड़े किसी भी विवाद या आरोप पर पारदर्शिता आवश्यक है। अगर आरोप निराधार हैं तो जांच के माध्यम से सच्चाई सामने लाई जाए।
- मामले की निष्पक्ष जांच किसी स्वतंत्र और उच्चस्तरीय एजेंसी (जैसे CBI, ED) से कराई जाए।
- दान की राशि इकट्ठा करने, गिनने, ले जाने और बैंक में जमा करने की पूरी प्रक्रिया का विशेष ऑडिट कराया जाए।
- अगर किसी व्यक्ति, कर्मचारी या अधिकारी की गलती या संलिप्तता सामने आती है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
- जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए, ताकि देश के श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे।

भाजपा नेता ने पीएम से मामले की जांच कराए जाने की मांग की है।
अखिलेश बोले- सीसीटीवी जारी करने में क्या दिक्कत है?
अखिलेश ने मंगलवार को कहा- सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक करने में क्या दिक्कत है। साथ ही उन्होंने निजी कंपनियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए। पूछा कि चढ़ावे की गिनती जैसे संवेदनशील काम में ट्रस्ट और सरकारी बैंक के बीच निजी कंपनियों को शामिल करने का फैसला किसने लिया।
उन्होंने कहा- आखिर ट्रस्टी कहना क्या चाहते हैं किसी को समझ नहीं आ रहा है। हेराफेरी में संलिप्त लोगों को हिरासत में लेने की खबरें अखबारों, टीवी चैनलों पर प्रसारित की जा रही हैं। पहले पुलिस कुछ नहीं कहती, लेकिन बाद में खंडन करती है। जनता के आक्रोश को देखकर पूरे देश के भाजपाइयों की घिग्घी बंध गई है।

चोरी के दावे पर नेताओं ने क्या कहा, जानिए…
- डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा- सपा मुखिया अखिलेश यादव जी आपने कभी सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का सम्मान नहीं किया। आपकी सोच बाबरवादी है। श्रीराम मंदिर को लेकर अफवाह फैला कर झूठ गढ़ने का असफल प्रयास कर रहे हैं। जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य ने कहा कि अखिलेश अच्छा नहीं कर रहे हैं। मैं यही कह रहा हूं कि एक भी पैसा चोरी नहीं हो रहा है। जब दर्शन नहीं करेंगे, जब रामलला को निहारा ही नहीं तो आरोप तो लगाएंगे ही। जब रूप निहारेंगे तो आरोप बंद हो जाएंगे।
- सहारनपुर में कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने राम मंदिर चंदे में कथित गड़बड़ी को लेकर अखिलेश यादव के आरोपों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा- अखिलेश जी ने जो बात कही होगी, वह किसी न किसी तथ्य के आधार पर कही होगी। वे हवा में बातें नहीं करते हैं।
- मंत्री ओपी राजभर ने कहा- अखिलेश यादव कभी अयोध्या गए हैं? राम मंदिर का दरवाजा किधर है, वो देखे हैं? उनके पास कौन सबूत आ गया कि रुपए की चोरी हो गई। सरकार को पता नहीं, खुफिया तंत्र को पता नहीं और इनको जरूर पता हो गया। तो ये सब झूठ बोलने वाले लोग हैं, गुमराह करने वाले लोग हैं, और कुछ है नहीं।
- अयोध्या से सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा- प्रभु श्रीराम के मंदिर में करोड़ों रुपए के चढ़ावे में हेरा-फेरी हुई है, लूट हुई है। ये लूट करने वाले कोई बाहरी नहीं हैं। लूट करने वालों जनता जानती है।
- आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा- अखिलेश यादव जी और उनकी पार्टी की बात पर यकीन नहीं किया जा सकता है। ये वो लोग हैं, जो श्रीराम मंदिर के रास्ते में रोड़े अटकाना चाहते थे। ये राम मंदिर का हमेशा विरोध करने वाले लोग हैं।

महंत नृत्य गोपाल दास राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं। ये तस्वीर ट्रस्ट की बैठक से जुड़ी 5 महीने पुरानी है।
राम मंदिर में चढ़ावे की गिनती की व्यवस्था जानिए…
राम मंदिर में चढ़ावे की गिनती बैंक कर्मचारी ट्रस्ट के लोगों की मौजूदगी में करते हैं। यह काम सीसीटीवी की निगरानी में होता है।
दान की रकम को रजिस्टर पर चढ़ाया जाता है। फिर उसे राम मंदिर परिसर में ही बने लॉकर में रख दिया जाता है। अगले दिन रुपए बैंक में जमा कर दिए जाते हैं। ट्रस्ट का मुख्य खाता अयोध्या धाम के भारतीय स्टेट बैंक में है।
चढ़ावे की रकम के ऑडिट का पूरा काम टीसीएस (टाटा कंसलटेंसी सर्विसेज) की निगरानी में किया जाता है। राम मंदिर में चढ़ावा कितना आता है। इसकी जानकारी ट्रस्ट की बैठक में ही दी जाती है। आखिरी बार दिसंबर 2025 में चढ़ावे की जानकारी दी गई थी।
मंदिर पर 2,475 करोड़ रुपए खर्च
13 दिसंबर, 2025 को मंदिर ट्रस्ट की बैठक में जानकारी सामने आई थी कि अब तक ट्रस्ट को कुल 4,575 करोड़ रुपए मिले हैं। पिछले 5 साल 9 महीने में मंदिर निर्माण, श्रीराम जन्मभूमि परिसर के विस्तार, जमीन और भवन की खरीद सहित अन्य कई कामों पर 2,475 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। तब ट्रस्ट के पास लगभग 2100 करोड़ रुपए बचे थे।
अयोध्या के राम मंदिर में रोज एक करोड़ रुपए से ज्यादा का दान
राम मंदिर में भगवान रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा 22 जनवरी, 2024 को हुई थी। बीते दो सालों में राम मंदिर की तस्वीर तेजी से बदली है। मंदिर की आय का मुख्य स्रोत दान और बैंक डिपॉजिट पर मिलने वाला ब्याज है।
ग्लोबल वेल्थ इंडेक्स-2026 की एक रिपोर्ट के अनुसार, मंदिर की अचल संपत्तियों में लगभग 70 एकड़ का मुख्य परिसर और उसके आसपास की अधिग्रहित भूमि है। साथ ही निर्माणाधीन मंदिर की भव्य संरचना (जिसकी निर्माण लागत ही ₹1,800 करोड़ से अधिक है), इसकी कुल संपत्ति को ₹6,000 करोड़ से ₹8,000 करोड़ के पार ले जाती है।


5 फरवरी 2020 को बना था श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केंद्र सरकार ने 5 फरवरी 2020 को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन की घोषणा की थी। केंद्र सरकार ने ट्रस्ट के संस्थापक अध्यक्ष के रूप में वरिष्ठ वकील केशव पराशरण सहित कुल नौ सदस्यों की नियुक्ति की थी।
इसी दिन शाम को श्रीराम जन्मभूमि के अधिग्रहीत क्षेत्र के तत्कालीन रिसीवर और मंडलायुक्त मनोज कुमार मिश्र ने बैंक खातों सहित समस्त प्रभार ट्रस्ट के प्रमुख सदस्य और अयोध्या नरेश विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र को सौंप दिया था।
हालांकि, ट्रस्ट की पहली औपचारिक बैठक 20 फरवरी 2020 को हुई थी, जिसमें मणिराम छावनी के महंत नृत्यगोपाल दास को ट्रस्ट का अध्यक्ष और विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय को महासचिव चुना गया।
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