(सागर कुलकर्णी)
वाशिंगटन, 15 सितंबर अमेरिका के एक सांसद ने रूस पर प्रतिबंध लगाने के प्रस्ताव वाले विधेयक में एक संशोधन पेश किया है जिसमें भारत समेत रूस के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के नाम कानून में शामिल करने की मांग की गई है। लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट को पिछले महीने अमेरिकी सीनेट ने भारी बहुमत (86-11 वोट) से पारित किया था। इस विधेयक का मकसद न सिर्फ रूस के नेतृत्व और ऊर्जा क्षेत्र पर प्रतिबंध लगाना है, बल्कि उन जहाजों के ‘शैडो फ्लीट’ (गुप्त बेड़े) पर भी प्रतिबंध लगाना है जिनकी मदद से मॉस्को तेल आपूर्ति पर लगी पाबंदियों से बचता है।
अमेरिका का मानना है कि रूस के कच्चे तेल व्यापार से यूक्रेन के खिलाफ युद्ध के लिए धन जुटाया जा रहा है। इस विधेयक में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को चीन और भारत समेत रूस के प्रमुख तेल व्यापार साझेदार देशों पर शत प्रतिशत शुल्क लगाने का अधिकार देने का भी प्रस्ताव है। गत सात अगस्त को अमेरिकी सीनेट से पारित हुए विधेयक में रूस के व्यापारिक साझेदारों के नाम नहीं हैं, लेकिन इसमें मात्रा के हिसाब से तेल और गैस के पांच सबसे बड़े आयातकों का जिक्र है।
राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के लिए भेजे जाने से पहले इस विधेयक का ‘हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स’ (प्रतिनिधि सभा) में पारित होना जरूरी है। तीन नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले सदन में कामकाज के लिए चार दिन बचे हैं। डेमोक्रेट सांसद स्टेनी होयर द्वारा पेश किए गए संशोधन में चीन, भारत, तुर्किए, अजरबैजान, हंगरी, स्लोवाक गणराज्य, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), सिंगापुर, कजाकिस्तान और किर्गिज गणराज्य को उन देशों के रूप में नामित करने की मांग की गई है जिन पर शत प्रतिशत शुल्क लगाया जा सकता है।
दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप को शुल्क लगाने की और अधिक शक्तियां देने का कड़ा विरोध करते डेमोक्रेट सांसद ग्रेगरी मीक्स ने ‘प्रावधान-113’ को पूरी तरह खत्म करने का संशोधन पेश किया है। इस प्रावधान के तहत राष्ट्रपति को रूस के व्यापारिक साझेदारों पर व्यापक द्वितीयक शुल्क लगाने का अधिकार देने का प्रस्ताव है।
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