Digital Payments India: UPI ट्रांजेक्शन को लेकर हाल ही में जो आंकड़े सामने आए हैं, उन्होंने डिजिटल भुगतान की रफ्तार को ले कर एक नई बहस छेड़ दी है. मार्च 2026 में जहां UPI ने 2016 में लॉन्च होने के बाद अब तक का सबसे बड़ा रिकार्ड बनाया था, वहीं अप्रैल 2026 में इसकी रफ्तार में थोड़ी गिरावट दिखाई दी है. अचानक UPI ट्रांजेक्शन आई इस कमी ने सबको हैरान कर दिया है.
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, मार्च 2026 में ट्रांजेक्शन वॉल्यूम और वैल्यू दोनों ने बड़ा रिकार्ड दर्ज किया था. लेकिन बाद में यह सवाल उठने लगा है कि क्या लोगों का होने लगा मोहभंग है या यह सिर्फ एक नॉर्मल उतार-चढ़ाव है.
मार्च के रिकॉर्ड के बाद अप्रैल में गिरावट
अप्रैल 2026 में UPI ट्रांजेक्शन का कुल मूल्य 1.7% घटकर ₹29.03 ट्रिलियन रह गया, जबकि मार्च में यह ₹29.53 ट्रिलियन का कारोबार था. सिर्फ वैल्यू ही नहीं, बल्कि ट्रांजेक्शन की संख्या (वॉल्यूम) भी घटकर 22.35 बिलियन पर आ गई है. हालांकि, सालाना आधार पर देखा जाए तो स्थिति अभी भी मजबूत बनी हुई है. लेनदेन की संख्या में करीब 25% और मूल्य में 21% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
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FASTag, IMPS और AePS में भी सुस्ती
UPI के साथ-साथ अन्य डिजिटल पेमेंट में भी अप्रैल 2026 में हल्की गिरावट देखने को मिली है. सिर्फ UPI ही नहीं, बलकि फास्टैग और आईएमपीएस को भी काफी बड़ा झटका लगा है. इमीडिएट पेमेंट सर्विस (IMPS) में मासिक आधार पर करीब 1% की कमी आई और यह ट्रांजेक्शन 362 मिलियन पर आ कर रुक गई, जबकि इसका कुल मूल्य भी करीब 5% घटकर ₹7.01 ट्रिलियन हो गया है.
FASTag लेनदेन में भी करीब 1.6% घटकर 358 मिलियन तक रह गए, जबकि इसका मूल्य 2% घटकर करीब ₹7,025 करोड़ पर पहुंच गया है. इसी तरह आधार सक्षम भुगतान प्रणाली (AePS) में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिला, जहां लेनदेन की संख्या करीब 15% और मूल्य में 14% की गिरावट दर्ज की है.
डिजिटल पेमेंट में गिरावट या मौसमी असर?
भले ही हालिया आंकड़े पहली नजर में काफी चिंता पैदा करने वाले लग रहे हैं, लेकिन सिक्के के दूसरे पहलू की कहानी कुछ और ही बयां करता है. विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिरावट किसी बड़ी मंदी का संकेत नहीं, बल्कि ‘मार्च इफेक्ट’ का परिणाम है.
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मार्च 2026 में वित्तीय वर्ष की समाप्ति (Year-end) के कारण लेनदेन में अचानक उछाल आया था, जिसने उस महीने इतिहास के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए थे. दरअसल अप्रैल में जो गिरावट आई थी वह उसी ऊंची छलांग के बाद की एक सामान्य स्थिरता माना जा रहा है.
विशेषज्ञों की राय और डिजिटल भुगतान का भविष्य
कैशफ्री पेमेंट्स के सीईओ आकाश सिन्हा ने कहा, “यह मांग में कमी नहीं, बल्कि मौसमी प्रभाव है.” उनके मुताबिक, वॉल्यूम के साथ-साथ वैल्यू में तेज वृद्धि यह संकेत देती है कि लोग अब UPI का इस्तेमाल बड़े और ज्यादा भरोसेमंद पेमेंट के लिए भी कर रहे हैं.
इसी तरह पेनियरबाय के फाउंडर और सीईओ आनंद कुमार का कहना है कि डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम बड़े पैमाने पर लगातार मजबूत हो रहा है और UPI अब आम लोगों की लाइफस्टाइल का अहम हिस्सा बन चुका है. ग्रामीण और छोटे-शहरी इलाकों में भी डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल काफी तेजी से बढ़ रहा है, खासकर छोटे-छोटे व्यापारी इसका इस्तेमाल कर रहे हैं.
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