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ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने माना कि ऐसा कदम उठाना आसान नहीं होगा, लेकिन उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि सरकारें यह नहीं मान सकतीं कि समस्या उनके नियंत्रण से बाहर है। स्टारमर ने कहा कि हमारे पास कुछ करने की क्षमता है। हम चीज़ें बदल सकते हैं और हम चीज़ें बदलेंगे। उन्होंने तर्क दिया कि नीति-निर्माताओं को इस सोच का विरोध करना चाहिए कि युवाओं पर सोशल मीडिया के असर से निपटना असंभव है। स्टार्मर ने बच्चों पर सोशल मीडिया के असर को लेकर चेतावनी दी इस बैन के पक्ष में बात करते हुए स्टारमर ने कहा कि सोशल मीडिया बच्चों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर तेज़ी से असर डाल रहा है और उनकी सेहतमंद दिनचर्या और विकास में बाधा डाल रहा है। उनके अनुसार, सोशल मीडिया का ज़्यादा इस्तेमाल बच्चों को उन गतिविधियों से दूर रखता है जो उनके विकास के लिए ज़रूरी हैं, जैसे पढ़ाई-लिखाई, दोस्तों के साथ समय बिताना और अच्छी नींद लेना।
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उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया बच्चों को नाखुश बना रहा है।” उन्होंने आगे कहा कि कई प्लेटफ़ॉर्म इस तरह से बनाए गए हैं कि उनकी लत लग जाती है और यूज़र्स घंटों तक उनसे जुड़े रहते हैं। प्रधानमंत्री ने ऑनलाइन बुलीइंग और दुर्व्यवहार को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म अक्सर बच्चों को निशाना बनाना आसान बना देते हैं, जिससे उनके मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। एक माता-पिता के तौर पर अपने अनुभव का ज़िक्र करते हुए स्टारमर ने कहा कि यह फ़ैसला हल्के-फुल्के ढंग से नहीं लिया गया, बल्कि आख़िरकार यह ज़रूरी हो गया था। उन्होंने कहा, “मैं हमेशा से यही चाहता रहा हूँ कि मेरे बच्चे खुश और सुरक्षित रहें। मुझे लगता है कि हर माता-पिता यही चाहते हैं।
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सरकार ऑनलाइन सुरक्षा में बड़े बदलाव की योजना बना रही है
स्टारमर ने ज़ोर देकर कहा कि यह पॉलिसी सिर्फ़ सोशल मीडिया पर रोक लगाने से कहीं ज़्यादा है। उन्होंने कहा कि सरकार गेमिंग सर्विस, लाइव-स्ट्रीमिंग प्लेटफ़ॉर्म और ऐसी डिजिटल जगहों के लिए व्यापक उपाय तैयार कर रही है, जहाँ अनजान लोग बिना ज़रूरी सुरक्षा इंतज़ामों के बच्चों से संपर्क कर सकते हैं। सरकार का मानना है कि सुधारों का यह पैकेज युवा यूज़र्स के लिए मज़बूत सुरक्षा व्यवस्था बनाएगा और साथ ही ब्रिटेन को तकनीकी इनोवेशन का फ़ायदा भी मिलता रहेगा।
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