Ashoke Sen Simple Lifestyle: हममें से अधिकांश लोगों ने दुनिया के महान वैज्ञानिक प्रोफेसर अशोक सेन का नाम शायद ही सुना होगा. सुना भी कैसे होगा वे इतने सादा जीवन जीते हैं कि आज भी साइकिल से ही सफर करते हैं. उन्होंने स्ट्रिंग थ्योरी की महान खोज की है लेकिन किसी भी सोशल प्लेटफॉर्म पर वे नहीं है. उन्हें भारत सरकार की ओर से पद्मभूषण और दुनिया का सबसे बड़ा विज्ञान पुरस्कार भी मिल चुका है लेकिन उनके विचार एकदम सादगी से लवरेज हैं. आइए इस महान वैज्ञानिक के जीवन के बारे में जानते हैं.
प्रोफेसर अशोक सेन. फाइल फोटो
कौन हैं ये महान वैज्ञानिक
अशोक सेन का जन्म कोलकाता में 1956 में हुआ था. दिलचस्प बात यह है कि उनके पिता भी भौतिकी विज्ञान के ही शिक्षक थे. वे स्कॉटिश चर्च कॉलेज में भौतिकी पढ़ाते थे. उनके बायोग्राफी से यही लगता है कि वे कोई एक्स्ट्राऑर्डिनरी बालक नहीं थे लेकिन हर चीज में उनकी जिज्ञासा रहती थी. बचपन से लेकर 11वीं तक उनकी पढ़ाई बंगाली माध्यम से हुई. अंग्रेजी उन्हें बचपन में न के बराबर आती थी. 11 वीं में उन्हें पता चला कि आईआईटी नाम का संस्थान होता है. फिर वे अंग्रेजी की ओर ध्यान देने लगे. इसके बाद प्रेसीडेंसी कॉलेज से उन्होंने बीएससी किया. इसके बाद उन्होंने आईआईटी कानपुर से मास्टर की पढ़ाई की और यहीं से उनकी पूरी जिंदगी बदल गई. आईआईटी में उनकी बौद्धिक क्षमता को धार मिली और रिसर्च में अपनी छाप छोड़ते रहे.
अमेरिका से पीएचडी
आईआईटी के बाद स्कॉलरशिप पर अशोक सेन उच्च शिक्षा के लिए विदेश चले गए. सबसे पहले अमेरिका के स्टोनी ब्रुक यूनिवर्सिटी से PhD किया. इसके बाद फर्मिलैब और स्टैनफोर्ड जैसी दुनिया की शीर्ष प्रयोगशालाओं में शोध कार्य किया. उनके पास बेहतरीन अवसर थे. अगर वे चाहते तो अमेरिका में ही एक शानदार वेतन वाली नौकरी और शानदार लाइफ को चुन सकते थे. लेकिन अशोक सेन को अपने देश भारत की याद सताती रही. वे अमेरिका से वापस आ गए. 1980 के दशक के अंत में वे मुंबई स्थित टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च से जुड़े. बाद में, 1995 में वे प्रयागराज के हरीश-चंद्र अनुसंधान संस्थान में अध्यापन करने लगे. तब से आजतक वे इसी संस्थान में अपनी सेवाएं देकर इतनी बड़ी रिसर्च में लगे हुए हैं.
सादगी की मिसाल
प्रयागराज के कैंपस में प्रोफेसर अशोक सेन बेहद सादगी भरा जीवन जीते हैं. वे हमेशा कैंपस में साइकिल से आते हैं. प्रोफेसर सेन किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मौजूद नहीं है. उनकी मीडिया में भी फेम होने की कोई दिलचस्पी नहीं है. उनका लिबास भी बेहद साधारण होता है. 2012 में प्रोफेसर सेन को एक फोन से उन्हें दुनिया के पहले ब्रेकथ्रू प्राइज इन फंडामेंटल फिजिक्स से नवाजे जाने की सूचना मिली. यह नोबले प्राइज की राशि से तीन गुना थी. उस समय 16 करोड़ की राशि थी. सबको लगा कि अब प्रोफेसर सेन बदल जाएंगे लेकिन आज भी वे साइकिल से ही यात्रा करते हैं. प्रोफेसर अशोक सेन को ढेरो पुरस्कार और सम्मान मिल चुके हैं. कई अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों के साथ ही उन्हें भारत सरकार पद्म भूषण सम्मान से भी सम्मानित किया है
सेन ने किस चीज की खोज की
प्रोफेसर अशोक सेन ने जिस चीज की खोज की उसे समझने से पहले यह जान लीजिए कि ब्रह्मांड को समझने के लिए अब तक दो तरह के सिद्धांत है. सापेक्षता का सिद्धांत जिसमें गुरुत्वाकर्षण को समझा जाता है और दूसरा क्वांटम मैकेनिक्स जिसमें परमाणु स्तर पर नन्हें कण को समझा जाता है. अब इसमें एक नया सिद्धांत आ गया है जिसे स्ट्रिंग थ्योरी कहा जाता है. यह थ्योरी इन दोनों को एक ही गणितीय ढांचे में लाने की कोशिश करती है, इसीलिए इसे ‘Theory of Everything’ भी कहा जाता है. प्रोफेसर अशोक सेन ने इस स्ट्रिंग थ्योरी के लिए महान काम किया है. अब समझिए कि स्ट्रिंग ऑफ थ्योरी होता क्या है. पारंपरिक भौतिकी हमें बताती है कि दुनिया इलेक्ट्रॉन और क्वार्क जैसे नन्हे कणों से बनी है. लेकिन स्ट्रिंग थ्योरी कहती है कि अगर हम इन कणों को और भी गहराई से देखें, तो वे बिंदु नहीं हैं, बल्कि ऊर्जा के नन्हे कंपन करते हुए धागे हैं. सीधे शब्दों में कहे सब कुछ धागों में लिपटा हुआ है. अशोक सेन न केवल भारत के, बल्कि दुनिया के सबसे सम्मानित स्ट्रिंग थ्योरी वैज्ञानिकों में से एक हैं. स्ट्रिंग थ्योरी को आज जिस मुकाम पर हम देखते हैं, उसे वहां तक पहुंचाने में उनका योगदान क्रांतिकारी माना जाता है.
The Untold Story of Ashoke SenBorn in Kolkata in 1956, Ashoke Sen grew up in a modest academic environment where curiosity mattered more than recognition. He studied physics at Presidency College and later completed his PhD at Stony Brook University in the U.S.But unlike many… pic.twitter.com/HjezSoDogo
— Shubham Mishra (@brahma_4u) February 10, 2026
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