ईरान से जंग, लेबनान में हिजबुल्लाह पर हमले और गाजा में हमास से दो-दो हाथ…. तीन मोर्चों पर उलझे इस्राइल के सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल इयाल जमीर ने चेताया है कि जवानों की भारी मी है और इसका हल नहीं निकला तो इस्राइली सेना अंदरूनी तौर पर ‘ढह’ सकती है। सुरक्षा मामलों की कैबिनेट मीटिंग में जनरल जमीर ने 10 खतरों (10 रेड फ्लैग) को सामने रखा। यरूशलम पोस्ट के मुताबिक डिफेंस चीफ ने कहा कि अगर मैन पावर की शॉर्टेज का सॉल्यूशन नहीं निकला तो आर्मी कोलैप्स कर जाएगी। आईडीएफ के सूत्रों ने बताया कि अभी तो युद्ध चल रहा है पर इजराइल को शांति के समय गजा, लेबनान, सीरिया, वेस्ट बैंक के बॉर्डर्स पर सैनिकों की जरूरत है। उन्होंने यह भी बताया कि अगर सरकार सैनिकों की भर्ती नहीं करती है तो कई जगह बिग गैप्स यानी कि सैनिकों की भारी कमी हो जाएगी। आगे यह भी बताया कि सरकार की ओर से हरेदी यहूदी को सेना में शामिल करने के लिए अभी तक कोई ठोस कानून नहीं लाया गया है।
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इजरायली सेना के प्रमुख ने जिन खतरों को गिनाया, उनमें जवानों की कमी के साथ मिशन पर जुटे सैनिकों पर बढ़ता बोझ, थकान, अर्थव्यवस्था पर बुरा प्रभाव, हथियार सप्लाई में कमी का जोखिम, अग्रिम मोर्चों पर अनुभवी कमांडरों की कमी और भर्ती में असमानता, ट्रेनिंग में गिरावट, मानसिक स्वास्थ्य का संकट अहम हैं। इन खतरों से जल्द नहीं निपटे तो सेना ढह जाएगी। हरेदी यहूदियों को अल्ट्रा ऑर्थोडॉक्स यहूदी कहा जाता है। मतलब इजराइल के कट्टरपंथी यहूदी। इस समुदाय के पुरुषों को तोरातो उमुनातो व्यवस्था के तहत एक विशेष छूट मिलती है कि वह यहूदी धर्म ग्रंथ तोराह की पढ़ाई अपने धार्मिक स्थल पर रहकर कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें मिलिट्री सर्विस से छूट मिल सकती है। फिलहाल इजराइल गजा, लेबनान, सीरिया, वेस्ट बैंक के फ्रंट पर युद्ध लड़ रहा है। साथ ही हरेदी यहूदियों की सेना में शामिल ना होने की वजह से सेना में भारी कमी आई है। हरेदी सेना मुद्दे पर इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजमिन नेतन्याहू का कहना है कि उनकी भर्ती से जुड़े बिल को वॉर की वजह से साइड कर दिया गया है क्योंकि इससे देश की एकता पर खतरा पड़ सकता है।
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विपक्ष ने कहा, बिना देरी लागू हो अनिवार्य सैन्य सेवा कानून
सेना का संकट सामने आने के बाद इस्राइल के विपक्षी नेताओं ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जवान बढ़ाने के लिए तुरंत इमरजेंसी बैठक बुलाए। विपक्षी नेता यायर लैपिड ने कहा कि तुरंत अनिवार्य सैन्य सेवा कानून लागू हो। सूत्रों ने बताया कि सैनिकों की कमी की बड़ी वजह यह भी है कि हरेदी समुदाय ने सेना में शामिल होने का विरोध किया है। इसके कारण अनिवार्य सैन्य सेवा कानून पर पेंच फंसा है। हरेदी समुदाय पूरा समय पवित्र यहूदी ग्रंथों की स्टडी में समर्पित रहते है और इन्हें सेना में काम में छूट है।
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