शेयर बाजार में निवेश करने वाले लाखों निवेशकों के लिए सरकार ने एक महत्वपूर्ण स्थिति स्पष्ट कर दी है। लोकसभा में दिए गए लिखित जवाब में सरकार ने कहा है कि फिलहाल खुदरा और घरेलू निवेशकों के लिए दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर समाप्त करने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। पिछले कुछ समय से बाजार के कई जानकार और निवेशक इस कर में राहत की मांग कर रहे थे ताकि निवेशकों का भरोसा बढ़े और बाजार में सकारात्मक माहौल बने।
बता दें कि वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने 20 जुलाई को लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी। उनसे पूछा गया था कि सरकार खुदरा और घरेलू निवेशकों के लिए दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर कब समाप्त करेगी, ताकि बाजार में निवेश को बढ़ावा मिले, घरेलू निवेशकों के हितों की रक्षा हो और विदेशी तथा भारतीय निवेशकों के बीच समान अवसर सुनिश्चित किए जा सकें।
अपने जवाब में पंकज चौधरी ने स्पष्ट कहा कि ऐसा कोई प्रस्ताव फिलहाल सरकार के विचाराधीन नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि कर व्यवस्था, जिसमें पूंजीगत लाभ कर की दरें भी शामिल हैं, की समय-समय पर समीक्षा की जाती है। यह समीक्षा आमतौर पर केंद्रीय बजट और आवश्यक विधायी संशोधनों के दौरान व्यापक आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर की जाती है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, सरकार को दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर से लगातार अच्छी आय प्राप्त हुई है। आकलन वर्ष 2024-25 में, जो वित्त वर्ष 2023-24 से संबंधित है, इस कर से 72,249 करोड़ रुपये का संग्रह हुआ था। वहीं आकलन वर्ष 2025-26, जो वित्त वर्ष 2024-25 से जुड़ा है, में यह संग्रह बढ़कर 1,29,158 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इस तरह दो वर्षों में सरकार को इस मद से कुल 2.01 लाख करोड़ रुपये की आय प्राप्त हुई है।
गौरतलब है कि सूचीबद्ध शेयरों और इक्विटी आधारित म्यूचुअल फंड में निवेश पर दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर की दर 12.5 प्रतिशत निर्धारित है। यह कर केवल तब लागू होता है, जब किसी वित्तीय वर्ष में निवेशक का लाभ 1.25 लाख रुपये से अधिक हो। इसके अलावा किसी शेयर या इक्विटी निवेश को दीर्घकालिक संपत्ति तभी माना जाता है, जब उसे कम से कम 12 महीने तक रखा गया हो।
सरकार ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की। जवाब में कहा गया कि इक्विटी निवेश पर विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों, घरेलू निवेशकों और खुदरा निवेशकों सभी के लिए दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर की दर समान रूप से 12.5 प्रतिशत है। हालांकि वर्ष 2026 के आयकर संशोधन अध्यादेश के तहत केवल सरकारी प्रतिभूतियों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के निवेश पर मिलने वाले ब्याज और पूंजीगत लाभ को आयकर से छूट दी गई है।
बता दें कि इससे पहले केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भी यह कह चुकी हैं कि सरकार शेयर बाजार से जुड़े निवेशकों की चिंताओं और सुझावों को सुनने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा था कि दीर्घकालिक और अल्पकालिक पूंजीगत लाभ कर से जुड़े सुझावों पर सरकार उचित समय पर विचार कर सकती है। हालांकि फिलहाल सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर समाप्त करने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं हैं।
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