शिक्षक दिवस पर स्कूल में देने के लिए एक शानदार, दिल को छू लेने वाला भाषण यहां पढ़ें जिसे बोलकर आप सबकी तालियां बटोर सकते हैं।
आदरणीय प्रधानाचार्य महोदय, यहां मौजूद सभी शिक्षकगण और मेरे प्यारे सहपाठियों, आज हम सब शिक्षक दिवस के इस खास मौके पर एक साथ इकट्ठा हुए हैं। हमारी संस्कृति में गुरु को हमेशा से भगवान से भी ऊंचा दर्जा दिया गया है। कहा भी गया है- गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागूं पांय, बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय। यानी अगर गुरु और भगवान दोनों एक साथ खड़े हों, तो पहले चरण गुरु के ही छूने चाहिए, क्योंकि उन्होंने ही हमें भगवान तक पहुंचने की राह दिखाई।
माता-पिता हमें इस दुनिया में जन्म देते हैं और हमारा पालन-पोषण करते हैं, मगर सही मायनों में जीवन जीने की कला हमें हमारे शिक्षक ही सिखाते हैं। वे सिर्फ किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रहते, बल्कि सही-गलत का फर्क समझाते हैं, हमारे चरित्र को गढ़ते हैं और हमारे अंदर सपनों को पूरा करने का हौसला भरते हैं। शिक्षक असल में उस दीपक की तरह होते हैं, जो खुद जलकर भी दूसरों की जिंदगी को रोशन कर देता है। वे एक कुम्हार की तरह भी होते हैं, जो कच्ची मिट्टी जैसे विद्यार्थी को अपने अनुशासन और मार्गदर्शन से सुंदर आकार देते हैं।
आज भले ही इंटरनेट और तकनीक की बदौलत जानकारी उंगलियों पर उपलब्ध हो गई हो, लेकिन जो संस्कार, नैतिक मूल्य और सोचने का सही नजरिया एक शिक्षक अपने विद्यार्थी को दे सकता है, वह कोई मशीन या तकनीक कभी नहीं दे सकती। कक्षा में असफल होने के बाद जब शिक्षक अपने विद्यार्थी की पीठ थपथपाकर कहते हैं कि तुम यह कर सकते हो, तो वही एक वाक्य कई बार पूरे भविष्य की दिशा बदल देता है।
शिक्षक कभी सिर्फ परीक्षा पास कराने के लिए नहीं पढ़ाते, बल्कि वे हमें एक जिम्मेदार, संवेदनशील और सक्षम नागरिक बनाने का काम करते हैं। चाहे कोई डॉक्टर हो, इंजीनियर हो, वैज्ञानिक हो, कलाकार हो या फिर कोई बड़ा नेता, हर सफल इंसान की कामयाबी के पीछे किसी न किसी शिक्षक की मेहनत और मार्गदर्शन जरूर छिपा होता है।
ऐसे में हम सबका भी यह फर्ज बनता है कि अपने गुरुओं का सम्मान केवल एक दिन कार्ड देकर या फूल भेंट करके ही न करें, बल्कि उनके बताए रास्ते पर चलकर करें। सच्चा सम्मान यही होगा कि हम अनुशासित रहें, मन लगाकर पढ़ाई करें, समाज में अच्छे काम करें और अपने शिक्षकों का सिर हमेशा गर्व से ऊंचा रखें।
अंत में बस इतना ही कहना चाहूंगा-
अज्ञान का अंधेरा मिटाकर ज्ञान की ज्योत जलाते हैं,
सही राह दिखाकर शिक्षक, हमें इंसान बनाते हैं।
धन्यवाद! जय हिंद, जय भारत!
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