इस सप्ताह शेयर बाजार की दिशा मुख्य रूप से कच्चे तेल के दामों, दुनिया भर के बाजारों के संकेतों और कंपनियों के पहली तिमाही के नतीजों से तय होगी। जानकारों के मुताबिक, दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार और विदेशी संस्थागत निवेशकों का रुख भी बाजार में उतार-चढ़ाव लाने में बड़ी भूमिका निभाएगा।
टीसीएस के नतीजों पर रहेगी नजर
सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की बड़ी कंपनी टीसीएस 9 जुलाई को अपने जून तिमाही के वित्तीय परिणाम जारी करने जा रही है। बाजार के विशेषज्ञ इस पर करीब से नजर रख रहे हैं। खासकर कंपनी के प्रबंधन की उन टिप्पणियों पर ध्यान दिया जाएगा जो मांग के माहौल, खर्चों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े बिजनेस के मौकों के बारे में होंगी।
बाजार की पिछली बढ़त और मानसून का असर
बीते सप्ताह के दौरान शेयर बाजार में मजबूती देखी गई, जहां बीएसई सेंसेक्स 663.44 अंक (0.86%) और एनएसई निफ्टी 214.85 अंक (0.89%) की बढ़त के साथ बंद हुए। अब निवेशकों का पूरा ध्यान वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के नतीजों पर है। इसके साथ ही, मानसून की प्रगति और खरीफ फसलों की बुवाई के आंकड़े ग्रामीण इलाकों में मांग, महंगाई और देश की आर्थिक विकास दर को समझने के लिए बेहद अहम होंगे।
कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक संकेत
वैश्विक मोर्चे पर, अमेरिका और ईरान के बीच 11 जुलाई को तकनीकी बातचीत का अगला दौर शुरू होने की उम्मीद है। दूसरी तरफ, हॉर्मुज जलडमरूमध्य से कच्चे तेल की सप्लाई में रुकावट का डर कम होने के बाद तेल की कीमतें 68-69 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं। ऊर्जा की कीमतों में यह स्थिरता भारत में महंगाई को काबू में रखने और आर्थिक संतुलन के लिए एक अच्छा संकेत है।
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