मद्रास हाई कोर्ट ने तमिलनाडु की एंटी-करप्शन एजेंसी डीवीएसी को राज्य के नगर प्रशासन और जल आपूर्ति मंत्री केएन नेहरू के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने का निर्देश दिया है. ये आदेश ED की तरफ से भेजी गई जानकारी के आधार पर दिया गया है, जिसमें ट्रांसफर-पोस्टिंग में रिश्वत और टेंडर में कमीशनखोरी का बड़ा रैकेट चलने के आरोप है.
मामला नगर प्रशासन और जल आपूर्ति विभाग में 2538 पदों पर भर्ती से जुड़ा है. आरोप है कि इन पदों पर नियुक्ति के लिए 25 लाख से 35 लाख रुपये तक की रिश्वत ली गई. ED ने एक बैंक फ्रॉड केस की जांच के दौरान मंत्री के भाई के घर छापा मारा था. उसी दौरान एजेंसी को कई ऐसे दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड, कॉल लेटर और कथित फिक्स्ड लिस्ट मिली, जिनसे भर्ती में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का संकेत मिला.
ED ने तमिलनाडु पुलिस को भेजी थी पूरी जानकारी
ED ने 27 अक्टूबर 2025 को PMLA की धारा 66(2) के तहत ये पूरी जानकारी तमिलनाडु पुलिस को भेजी थी. दस्तावेज करीब 232 पन्नों के बताए गए है. इस मामले में दो याचिकाएं दाखिल हुई थी. एक जनहित याचिका और दूसरी एक राज्यसभा सांसद की तरफ से जिसमें FIR दर्ज करने की मांग की गई थी.
हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच (चीफ जस्टिस की अध्यक्षता में) ने अपने विस्तृत आदेश में कहा कि अगर किसी जानकारी से संज्ञेय अपराध (cognizable offence) का संकेत मिलता है, तो FIR दर्ज करना अनिवार्य है. पुलिस ये कहकर टाल नहीं सकती कि पहले लंबी प्रारंभिक जांच की जाएगी. सुप्रीम कोर्ट के ललिता कुमारी फैसले के मुताबिक, ऐसे मामलों में तुरंत FIR दर्ज होनी चाहिए. अदालत ने साफ किया कि करप्शन के मामलों में प्रारंभिक जांच जरूरी शर्त नहीं है. खासकर जब किसी जांच एजेंसी की तरफ से ठोस दस्तावेज भेजे गए हो.
अदालत ने तमिलनाडु की सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय (Directorate of Vigilance and Anti-Corruption) को निर्देश दिया है कि ED की रिपोर्ट के आधार पर आपराधिक मामला दर्ज किया जाए और निष्पक्ष जांच की जाए. कोर्ट ने ये भी कहा कि करप्शन के आरोप गंभीर है और इन्हें सिर्फ विभागीय जांच तक सीमित नहीं रखा जा सकता.
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