जब पूरी दुनिया ने अफगानिस्तान को उसके हाल पर छोड़ दिया, जब पड़ोसी देश पाकिस्तान ने भाई होने का ढोंग छोड़कर अफगानिस्तान की पीठ में छुरा घोंपा तब भारत ने एक ऐसा कदम उठाया जिसने पूरे दक्षिण एशिया की राजनीति को हिलाकर रख दिया। भारत और अफगानिस्तान के बीच 46 मिलियन डॉलर यानी करीब ₹400 करोड़ की एक ऐसी ऐतिहासिक डील हुई है जो सिर्फ व्यापार नहीं बल्कि पाकिस्तान की दादागिरी का अंत है। आखिर अचानक भारत ने तालिबान शासित अफगानिस्तान के साथ इतनी बड़ी इतनी भयानक डील क्यों की जब पाकिस्तान अफगानिस्तान के साथ बॉर्डर बंद करके बैठा है। झड़पें हो रही हैं और अफगान परिवार भूखे प्यासे परेशान है। तब भारत ने $6 मिलियन लगाकर यह कदम क्यों उठाया? पाकिस्तान ने तोरखम और स्पिन बोल्डक जैसे प्रमुख रास्तों को पूरी तरह से बंद कर रखा है। हजारों ट्रक सड़कों पर सड़ रहे हैं और अफगान किसानों के अंगूर, अनाज और सब्जियां मिट्टी में मिल रही है। पाकिस्तान की वजह से पाकिस्तान की सेना सीमा पर गोलीबारी कर रही है। मासूम अफगान परिवारों को जबरन उनके घरों से निकाल रही है और मासूम बच्चे दाने-दाने को मोहताज हैं। अब पाकिस्तान जो नापाक देश है उसका मकसद साफ है अफगानिस्तान को भूखा मारो उसे इतना कमजोर कर दो कि वो घुटने पर आ जाए। इतना ही नहीं विश्व खाद्य कार्यक्रम यानी डब्ल्यूएफपी चिल्ला चिल्ला कर कह रहा है कि अफगानिस्तान पर भारी दबाव है। लेकिन ऐसे नाजुक मोड़ पर भारत खामोश नहीं बैठा।
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भारत ने नफरत का जवाब नफरत से नहीं बल्कि विकास और विश्वास से दिया है। अब बात करते हैं उस खबर की जिसने पाकिस्तान की रातों की नींद उड़ा दी है। भारतीय कंपनी टीसीआरसी ने अफगान नेशनल स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी यानी एएनएसए के साथ एक मेगा कॉन्ट्रैक्ट डील साइन की है। अगले 5 सालों तक भारत अफगानिस्तान के काबुल समेत नौ सबसे महत्वपूर्ण बॉर्डर पॉइंट्स पर हाईटेक अत्याधुनिक लेबोरेटरीज़ यानी लैब्स का जाल बिछा देगा। अब तक अफगानिस्तान में जो भी सामान आता था या वहां से बाहर जाता था उसकी क्वालिटी जांचने का कोई पुख्ता सिस्टम था ही नहीं। अब भारत की तकनीक, भारत की टेक्नोलॉजी से वहां भोजन, दवाएं, कंस्ट्रक्शन, मटेरियल, टेक्सटाइल और बिजली के सामानों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जांच होगी। भारतीय कंपनी सिर्फ मशीनें नहीं लगाएंगी बल्कि पूरे सिस्टम को जो बॉर्डर एरिया के हैं उनको अपग्रेड करेंगी।
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अफगान स्टाफ को ट्रेनिंग भी देंगी और उन्हें आईसीओ सर्टिफिकेशन तक लेकर जाएंगी। मतलब अब दुनिया का कोई भी देश अफगान माल को लो क्वालिटी कहकर रिजेक्ट नहीं कर पाएगा। भारत ने अफगानिस्तान के हाथों में वो ताकत की चाबी दे दी है जिससे वो दुनिया के बाजारों में अपनी शर्तों पर अब व्यापार करने उतर चुका है। वो खुद को मुस्लिम उमा का रहनुमा बताता है। सच्चाई यह है कि आज अफगानिस्तान के लिए सबसे बड़ा रोड़ा, सबसे बड़ा कांटा वही बना हुआ है। पाकिस्तान चाहता है कि अफगानिस्तान हमेशा उस पर निर्भर रहे, डिपेंडेंट रहे। लेकिन भारत ने चाबहार और अब इन लैब्स के जरिए पाकिस्तान के उस ट्रांजिट फ्रूट के घमंड को मिट्टी में मिला दिया है। एएनएसए के प्रमुख फैजुल्लाह तमीम साहब ने कैमरे पर आकर भारत का शुक्रिया अदा किया। उन्होंने साफ कहा कि यह डील अफगानिस्तान को घटिया आयात से बचाएगी और उनके घरेलू उत्पादन को ग्लोबल बना देगी और यही भारत की जीत है। जब अफगान किसान का केसर या फल भारत की लैब से पास होकर यूरोप जाएगा तो उसकी कीमत चार गुना बढ़ जाएगी और यह है भारत की दूरदर्शिता। भारत ने कोई बहाना नहीं बनाया, कोई राजनीतिक शर्त नहीं थोपी ना लगाई बस दोस्ती निभाई, भाईचारा निभाया और जबकि पाकिस्तान खुद को भाई बताकर अफगानिस्तान को आर्थिक नाकेबंदी की सजा दे रहा है। हर दिन दे रहा है। यही फर्क है। सच्चे मित्र और झूठे पड़ोसी में आतंक परस्त पाकिस्तान में। भारत और अफगानिस्तान की दोस्ती सदियों पुरानी है।
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