नई सरकार के शुरुआती फैसलों में सार्वजनिक स्थानों पर नमाज और ध्वनि विस्तारक यंत्रों के उपयोग को लेकर सख्ती प्रमुख रही। सरकार ने स्पष्ट किया कि सड़कों और सार्वजनिक मार्गों पर नमाज की अनुमति नहीं होगी तथा धार्मिक गतिविधियां निर्धारित परिसरों तक सीमित रहेंगी। कोलकाता के रेड रोड क्षेत्र में सार्वजनिक नमाज पर भी रोक लगाने का निर्णय लिया गया है। इसके साथ ही ध्वनि प्रदूषण नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए लाउडस्पीकर के उपयोग पर भी नियंत्रण लगाया गया है। सरकार ने पत्थरबाजी की घटनाओं पर भी कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
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साथ ही सुवेंदु अधिकारी सरकार ने वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव और वर्ष 2023 के पंचायत चुनावों के बाद हुई हिंसा से जुड़े मामलों को फिर से खोलने का आदेश दिया है। इन मामलों को पिछली सरकार के दौरान बंद कर दिया गया था। मुख्यमंत्री ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक कर लंबित और बंद मामलों की दोबारा जांच कराने का निर्देश दिया। सरकार का कहना है कि चुनाव बाद हिंसा के पीड़ितों को न्याय दिलाना उसकी प्राथमिकता है।
इसी क्रम में भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या के मामलों को भी दोबारा जांच के दायरे में लाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले पंद्रह वर्षों में मारे गए तीन सौ इक्कीस भाजपा कार्यकर्ताओं के परिवार यदि चाहें तो सरकार निष्पक्ष जांच कराएगी। यह फैसला राजनीतिक हिंसा के मुद्दे पर भाजपा के लंबे अभियान का हिस्सा माना जा रहा है।
इसके अलावा, नई सरकार ने सांप्रदायिक हिंसा फैलाने वालों के खिलाफ गैर जमानती धाराओं में कार्रवाई करने और पुलिस को बिना राजनीतिक दबाव के काम करने की खुली छूट देने की घोषणा की है। प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि अवैध गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए और किसी की राजनीतिक पहचान को महत्व न दिया जाए। सरकार ने दावा किया है कि कानून व्यवस्था को राजनीतिक प्रभाव से मुक्त किया जाएगा।
साथ ही सीमा पार से होने वाली अवैध घुसपैठ और पशु तस्करी के मुद्दे पर भी सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। राज्य में अवैध पशु बाजारों को बंद करने और अवैध परिवहन पर रोक लगाने के निर्देश जारी किए गए हैं। दिनाजपुर, मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तर चौबीस परगना जिलों में चल रहे अवैध पशु बाजारों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई है। इसके साथ ही भारत बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने के लिए सीमा सुरक्षा बल को पैंतालीस दिनों के भीतर भूमि हस्तांतरित करने का निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे अवैध घुसपैठ और जनसंख्या संतुलन में हो रहे बदलावों पर रोक लगेगी।
इसके अलावा, पश्चिम बंगाल की नई सरकार ने राज्य में पशु वध को लेकर भी सख्त नियम लागू करने का निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने पश्चिम बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम 1950 के प्रावधानों को कड़ाई से लागू करने के निर्देश जारी किए हैं। नए आदेश के अनुसार अब किसी भी पशु के वध से पहले उसकी उपयुक्तता का प्रमाण पत्र लेना अनिवार्य होगा। यह प्रमाण पत्र नगर निकाय प्रमुख और सरकारी पशु चिकित्सक की संयुक्त सहमति से जारी किया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक स्थानों पर पशु वध पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा और केवल निर्धारित बूचड़खानों में ही इसकी अनुमति होगी। नियमों के उल्लंघन पर छह महीने तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान भी किया गया है। नई सरकार के इस कदम को कानून व्यवस्था, सार्वजनिक स्वच्छता और अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
साथ ही राज्य में लंबे समय से चर्चा में रहे सिंडिकेट राज और अवैध खनन पर भी सरकार ने कार्रवाई का संकेत दिया है। जिला और प्रखंड स्तर पर सक्रिय कथित सिंडिकेट नेटवर्क को समाप्त करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का मानना है कि पिछली व्यवस्था में निर्माण सामग्री और कई क्षेत्रों में प्रभावशाली समूहों का नियंत्रण था, जिसे खत्म करना आवश्यक है।
सुरक्षा व्यवस्था में भी बदलाव करते हुए आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों की सुरक्षा हटाने का निर्णय लिया गया है। इसके अलावा तृणमूल कांग्रेस शासनकाल में विभिन्न बोर्डों, सार्वजनिक उपक्रमों और गैर वैधानिक संस्थाओं में नियुक्त अध्यक्षों और सदस्यों की सेवाएं समाप्त करने के आदेश दिए गए हैं। साठ वर्ष से अधिक आयु वाले अधिकारियों को सेवा विस्तार देने पर भी रोक लगाने का निर्णय लिया गया है।
नई सरकार ने केंद्र की कई योजनाओं को पश्चिम बंगाल में लागू करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। आयुष्मान भारत, बेटी बचाओ बेटी पढाओ, प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, प्रधानमंत्री कृषक बीमा योजना, प्रधानमंत्री श्री योजना, विश्वकर्मा योजना और उज्ज्वला योजना को शीघ्र लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग को केंद्र सरकार के साथ आवश्यक समझौते तेजी से पूरा करने को कहा है।
साथ ही राज्य की नई भाजपा सरकार ने शिक्षा और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद से जुड़े मोर्चे पर भी बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने राज्य के सभी सरकारी स्कूलों में प्रार्थना सभा के दौरान वंदे मातरम् गाना अनिवार्य कर दिया है। आदेश के अनुसार कक्षाएं शुरू होने से पहले विद्यार्थियों को वंदे मातरम् के छहों पद गाने होंगे। सरकार का कहना है कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान यह गीत देशभक्ति और राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक रहा है। हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा वंदे मातरम् को जन गण मन के समान दर्जा दिए जाने के बाद इस निर्णय को और अधिक महत्व दिया जा रहा है। राज्य सरकार ने इसे राष्ट्रीय भावना और सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।
इसके अलावा, कानूनी ढांचे में बदलाव करते हुए भारतीय न्याय संहिता को राज्य में लागू करने की घोषणा भी की गई है। यह नया आपराधिक कानून पुराने भारतीय दंड संहिता का स्थान ले चुका है, लेकिन पश्चिम बंगाल में इसका कार्यान्वयन लंबित था। नई सरकार ने इसे तुरंत प्रभाव से लागू करने का निर्णय लिया है।
सरकारी नौकरियों के इच्छुक युवाओं को राहत देते हुए आयु सीमा चालीस से बढ़ाकर पैंतालीस वर्ष कर दी गई है। सरकार का कहना है कि इससे लंबे समय से अवसरों से वंचित युवाओं को लाभ मिलेगा और भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाया जाएगा।
जनगणना प्रक्रिया को भी नई सरकार ने फिर से शुरू करने का निर्णय लिया है। केंद्र सरकार के निर्देशों के बावजूद यह प्रक्रिया लंबे समय से लंबित थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार अब बिना किसी राजनीतिक अहंकार के केंद्र के निर्देशों के अनुरूप कार्य करेगी।
इसके अलावा, प्रशासनिक ढांचे में सुधार की दिशा में भी बड़े कदम उठाए गए हैं। भारतीय प्रशासनिक सेवा, भारतीय पुलिस सेवा और राज्य पुलिस अधिकारियों को केंद्र सरकार के प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भेजने का फैसला किया गया है। इसका उद्देश्य राज्य की प्रशासनिक कार्यप्रणाली को राष्ट्रीय स्तर के मानकों से जोड़ना है। इसी क्रम में स्वास्थ्य विभाग के आठ अधिकारियों ने नई दिल्ली में आयुष्मान भारत योजना से संबंधित तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त किया। शहरी विकास विभाग सहित अन्य विभागों के अधिकारियों के लिए भी प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए जा रहे हैं। इसे पश्चिम बंगाल की नौकरशाही में बड़े प्रशासनिक पुनर्गठन की शुरुआत माना जा रहा है।
बहरहाल, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सुवेंदु अधिकारी ने सत्ता संभालते ही हिंदुत्व आधारित राजनीति को जमीन पर उतारने की दिशा में तेज कदम बढ़ाने शुरू कर दिए हैं। सार्वजनिक स्थानों पर नमाज पर सख्ती, वंदे मातरम् को अनिवार्य करना, सीमा सुरक्षा, अवैध घुसपैठ और पशु तस्करी के खिलाफ कार्रवाई जैसे फैसलों को इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। भाजपा लंबे समय से बंगाल में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और कानून व्यवस्था को बड़ा मुद्दा बनाती रही है और अब सरकार बनने के बाद उसे अमली जामा पहनाने की कोशिश साफ दिखाई दे रही है। माना जा रहा है कि राज्य की एक बड़ी आबादी भी लंबे समय से ऐसे बदलावों की प्रतीक्षा कर रही थी, जिसका असर चुनाव परिणामों में भी देखने को मिला। नई सरकार के शुरुआती फैसलों ने यह संकेत दे दिया है कि आने वाले समय में बंगाल की राजनीति और प्रशासनिक दिशा दोनों में बड़े परिवर्तन देखने को मिल सकते हैं।
-नीरज कुमार दुबे
(इस लेख में लेखक के अपने विचार हैं।)
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