उच्चतम न्यायालय ने 2013 के बलात्कार मामले में पत्रकार तरुण तेजपाल को 10 साल कारावास की सजा सुनाने के बंबई उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर शुक्रवार को गोवा पुलिस को नोटिस जारी किया। न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति पी. बी. वराले की पीठ ने सजा बढ़ाने का अनुरोध करने वाली गोवा सरकार की याचिका पर तेजपाल को भी नोटिस जारी किया। तेजपाल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि यह ऐसा मामला है जिसमें अधीनस्थ अदालत के बरी करने के फैसले को उच्च न्यायालय ने पलट दिया।
उन्होंने इस मामले में तेजपाल की जमानत याचिका पर सुनवाई किए जाने का अनुरोध किया। सिब्बल ने तेजपाल की पैरवी करते हुए कहा, ‘‘यह बरी करने के फैसले को पलटने का मामला है, हमारे पास अपील का अधिकार है और मैंने आत्मसमर्पण कर दिया है। उच्च न्यायालय ने सजा पर चार सप्ताह के लिए स्वयं रोक लगाई थी।’’
पीठ ने कहा कि वह मामले की सुनवाई के लिए एक निश्चित तारीख तय करेगी।
उच्चतम न्यायालय ने 25 अगस्त को तेजपाल को 10 साल की सजा काटने के लिए तीन सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था और आत्मसमर्पण से छूट देने का अनुरोध खारिज कर दिया था। इसके बाद तेजपाल ने मामले में अधीनस्थ अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया था। तेजपाल को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की कई धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया था।
इनमें धारा 376(2)(एफ) (विश्वास या अधिकार की स्थिति में मौजूद व्यक्ति द्वारा बलात्कार), धारा 354(ए) (यौन उत्पीड़न) और धारा 354(बी) (निर्वस्त्र करने के इरादे से हमला या आपराधिक बल का इस्तेमाल) शामिल हैं। धारा 376(2)(एफ) के तहत अधिकतम सजा आजीवन कारावास है।
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