न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा यानी कि यूएनजीए के 81वें सत्र की है। जहां पर एक साथ कई सारे डेलीगेट्स अचानक से उठकर सभा से बाहर जाने लगते हैं। आपको बता दें कि यह डेलीगेट्स किसी ब्रेक पर नहीं जा रहे हैं। बल्कि ये वहां से वॉकआउट कर रहे हैं। जैसे ही इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भाषण देने के लिए मंच पर पहुंचते हैं। हॉल में जोरदार हंगामा शुरू हो जाता है। कई सारे देशों के डिप्लोमेट्स ने विरोध जताते हुए वॉकआउट कर दिया। एक-एक करके दर्जनों राजनीयक अपनी सीटों से उठकर बाहर निकल गए और देखते ही देखते हॉल की कई सारी सीटें खाली हो गई। लेकिन नेतन्याहू ने भी इस विरोध पर अपना अलग रुख दिखाया और मंच संभालते ही और वर्कआउट करने वाले डिप्लोमेट्स पर उन्होंने सीधा तंज कसा और सरेआम उन्हें मोरल कायर कह दिया। यानी कि नैतिक डरपोक। नेतन्याहू ने तंज कसते हुए कहा कि अगर कोई और भी कायर इस हॉल में बचा है तो वह भी बाहर चला जाए। मन से बोलते हुए बेंजामिन नेतन्याहू ने दुनिया भर में यहूदी विरोधी माहौल पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में यहूदी समुदाय से सिर उठाकर जीने और बिना डरे खड़ा रहने की अपील करते हैं।
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नेतन्याहू ने कहा कि दुनिया के यहूदी विरोधी लोग हमारे लोगों को डराना चाहते हैं। लेकिन मैं उन्हें बता दूं कि वह दिन लद गए जब यहूदी बेबस शिकार थे और उन्हें कत्लगाहों की तरह भेजा जाता था। आज हमारे पास अपना देश है। अपनी सेना है और अपने लोगों की रक्षा करने का पूरा जज्बा है। दुनिया भर के यहूदियों के लिए मेरा एक ही संदेश है। अपना सिर ऊंचा रखो। गर्व महसूस करो और डरो मत। नेतन्याहू का यह बयान अब सोशल मीडिया पर वायरल भी हो रहा है। इस हंगामे के बाद नेतन्याहू ने अपना पूरा भाषण दिया और अपने ही विरोधियों को जमकर घेरा भी। इन विरोधियों में नेतन्याहू ने न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी को भी निशाने पर लिया। मेयर ममदानी ने नेतन्याहू के यूएन दौरे का विरोध किया था। नेतन्याहू ने होलोस्ट के बाद यहूदियों का सबसे बड़ा नरसंहार बताया। वो आगे कहते हैं कि हमास के आतंकियों ने घर-घर वो गए और इजराइली नागरिकों को बेहद करीब से उन्होंने गोलियां मारी। उन्होंने यह सब एक खुशी के साथ किया। लोगों का कत्ल करते हुए वो इसका लाइव स्ट्रीम कर रहे थे और उन्होंने किनका कत्ल किया अपने पड़ोसियों का। उन्हीं इजराइलियों का जिन्होंने काम दिया था, रोजगार दिया था। जो गजा सीमा से फिलिस्तीनी बच्चों को अपनी गाड़ियों में बैठाकर कैंसर के इलाज के लिए इजराइली अस्पतालों में ले जाते थे और फिर वापस छोड़ देते थे।
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नेतन्याहू स्पीच में आगे कहते हैं कि हमास के इन दरिंदों ने होलोकस से बचे हुए बुजुर्गों तक को नहीं छोड़ा। उन्हें भी मार डाला। उन्होंने माता-पिता के सामने उनके मासूम बच्चों को जिंदा जला दिया। उस दिन उन्होंने कुल मिलाकर 1200 इजराइलियों का कत्लेआम किया। 1 करोड़ की आबादी वाले देश के लिए इसका क्या मतलब है। अगर रेश्यो देखें तो यह 24 घंटे से भी कम समय में 4000 बेगुनाह अमेरिकियों के मारे जाने के बराबर है। यानी यह 91 के हमले से 16 गुना बड़ा हमला था। ऐसा नेतन्याहू ने अपनी स्पीच में कहा है। इसी दिन यूएनजीए में पेस्तीनियन अथॉरिटी के प्रेसिडेंट महमूद अब्बास का भी संबोधन होता है। वो यूएनजीए में मौजूद नहीं थे। फिलिस्तीनी अथॉरिटी को वीजा ही नहीं दिया गया था। उनका वीजा रिजेक्ट कर दिया था। इसी बात का विरोध फिलिस्तीन ने किया। फिलिस्तीनी अथॉरिटी के राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने यूएनजीए की बैठक को संबोधित किया।
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