भारतीय फुटबॉल के दिग्गज और पूर्व कप्तान सुनील छेत्री ने शनिवार को कहा कि अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ), खिलाड़ी, कोच और मीडिया समेत सभी पक्ष एक-दूसरे पर आरोप लगाना बंद करें। उन्होंने कहा कि भारतीय फुटबॉल को फिर से पटरी पर लाने के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा। भारतीय फुटबॉल इस समय मुश्किल दौर से गुजर रहा है।
राष्ट्रीय टीम फीफा रैंकिंग में गिरकर 138वें स्थान पर पहुंच गई है जबकि इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) के पिछले व्यावसायिक प्रबंधन करार के खत्म होने के बाद घरेलू सत्र भी अनिश्चितता का सामना कर रहा है। हालांकि, भारतीय फुटबॉल खिलाड़ियों संघ के भारतीय फुटबॉल पुरस्कार 2026 समारोह के दौरान पत्रकारों से बातचीत में छेत्री ने उम्मीद जताई कि हालात सुधर सकते हैं। छेत्री ने कहा, ‘‘‘जितने वर्षों तक मैं खेला हूं, भारतीय फुटबॉल का रैंकिंग का ग्राफ हमेशा ऐसा ही रहा है।
शायद हम ऐसे दौर में हैं जहां चीजें बहुत अच्छी नहीं चल रही हैं, चाहे वह राष्ट्रीय टीम का प्रदर्शन हो या लीग से जुड़ी स्थिति। लेकिन हम सभी को उम्मीद बनाए रखनी होगी। ’’
उन्होंने कहा, ‘‘अंत में सब ठीक हो जाएगा।
इसमें समय लगेगा। आप सभी के चेहरों को देखकर लगता है कि हम चाहते हैं कि चीजें जल्द से जल्द ठीक हों। ऐसा होगा।
मैं हमेशा आशावादी रहता हूं। हालात थोड़े खराब हो सकते हैं, लेकिन सब ठीक हो जाएगा। ’’
छेत्री ने कहा कि राष्ट्रीय टीम के खराब प्रदर्शन के लिए खिलाड़ियों को भी जिम्मेदारी स्वीकार करनी होगी।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं भी राष्ट्रीय टीम का हिस्सा रहा हूं। रैंकिंग क्यों गिरी? क्योंकि हम जिस तरह खेले, जिन मैच को हमें जीतना चाहिए था, उनमें हम हार गए।
इसी वजह से हम इस स्थिति में हैं। खिलाड़ियों के तौर पर हम जिम्मेदारी लेते हैं। जब मैं टीम में था, तब मैंने भी यह जिम्मेदारी ली थी।
’’
बयालिस वर्षीय छेत्री ने कहा कि मौजूदा स्थिति का समाधान किसी एक पक्ष पर आरोप लगाने से नहीं हो सकता। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे पूरा विश्वास है कि अभी खेल रहे खिलाड़ी भी जिम्मेदारी लेंगे। लेकिन अगर देश में फुटबॉल को बेहतर स्थिति में पहुंचाना है तो हम सभी को बराबर जिम्मेदारी निभानी होगी।
’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमें एक-दूसरे को दोष नहीं देना चाहिए कि यह खिलाड़ी खराब है, कोच खराब है या एआईएफएफ खराब है। ’’
छेत्री ने कहा कि भारतीय फुटबॉल के सामने अब दो विकल्प हैं, या तो आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी रखा जाए या सभी मिलकर समस्याओं का समाधान निकालने की कोशिश करें। उन्होंने कहा, ‘‘हमें एक-दूसरे को दोष देने के बजाय साथ आना होगा।
हमारे पास विकल्प है। हम एक-दूसरे को दोष देते रह सकते हैं और जानते हैं कि इससे कहां पहुंचेंगे। या फिर हम सभी साथ आकर अपना काम कर सकते हैं।
’’
उन्होंने कहा कि इसमें मीडिया समेत हर किसी की भूमिका महत्वपूर्ण है। छेत्री ने हालांकि उम्मीद रखने के साथ यह भी कहा कि समस्याओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘हमें थोड़ा आशावादी रहना होगा।
निश्चित तौर पर हमें सही सवाल पूछने होंगे। कई चीजों में सुधार की जरूरत है। ’’
पूर्व भारतीय कप्तान ने कहा, ‘‘अगर हम एक-दूसरे को दोष देते रहेंगे तो इसका कोई फायदा नहीं होगा।
हमें चर्चा करनी होगी, बात करनी होगी, रास्ता तलाशना होगा और आगे बढ़ना होगा।
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