मात्र 4,000 क्विंटल का भंडारण
सरकार ने क्यों उठाया सख्त कदम?
उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय का कहना है कि हाल के दिनों में कुछ व्यापारियों और बिचौलियों द्वारा चीनी की जमाखोरी, सट्टेबाजी और बिना वास्तविक सप्लाई के कागजी कारोबार किए जाने के मामले सामने आए थे। इससे बाजार में चीनी की कृत्रिम कमी का माहौल बना और थोक व खुदरा कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला। इसी स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने यह सख्त कदम उठाया है।
अपडेट करनी होगी स्टॉक की जानकारी
नए नियमों के तहत सभी चीनी कारोबारियों को हर सप्ताह खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के ऑनलाइन पोर्टल पर अपने स्टॉक की जानकारी अपडेट करनी होगी। सरकार बाजार पर लगातार नजर रखेगी और जरूरत पड़ने पर आगे भी कार्रवाई कर सकती है।
देश में पर्याप्त चीनी उपलब्ध
सरकार ने यह भी साफ किया है कि देश में घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त चीनी उपलब्ध है। इसलिए आम लोगों को चीनी की कमी की चिंता करने की जरूरत नहीं है। सरकार का कहना है कि यह कदम केवल जमाखोरी और सट्टेबाजी रोकने के लिए उठाया गया है, जबकि सामान्य व्यापार और सप्लाई पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।
सितंबर 2026 तक चीनी के निर्यात पर रोक
दरअसल, पिछले कुछ हफ्तों में चीनी की कीमतें रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई थीं। इससे पहले भी सरकार जुलाई महीने के लिए घरेलू बिक्री का कोटा 22 लाख टन पर स्थिर रख चुकी है और सितंबर 2026 तक चीनी के निर्यात पर रोक लगा चुकी है, ताकि देश में पर्याप्त स्टॉक बना रहे।
थोक खरीदारों और कारोबारियों से अपील
उद्योग संगठन ISMA और NFCSF भी पहले ही थोक खरीदारों और कारोबारियों से अपील कर चुके हैं कि वे जरूरत से ज्यादा खरीदारी या सट्टेबाजी से बचें। वहीं, रेटिंग एजेंसी ICRA का अनुमान है कि 2025-26 सीजन में एथेनॉल के लिए डायवर्जन के बाद भी देश में करीब 2.8 करोड़ टन चीनी का उत्पादन होगा। सितंबर के अंत तक लगभग 43 लाख टन चीनी का स्टॉक बचने की उम्मीद है, जो करीब दो महीने की घरेलू खपत के बराबर है, यानी फिलहाल देश में चीनी की उपलब्धता को लेकर किसी तरह का संकट नहीं है, लेकिन सरकार कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए पूरी तरह सतर्क है।
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