भारत में चीनी की कीमतों को लेकर बड़ी राहत की खबर सामने आई है। चीनी उद्योग के शीर्ष संगठन ISMA (Indian Sugar Mills Association) ने साफ कहा है कि देश में चीनी की कोई कमी नहीं है और आने वाले समय में खुदरा बाजार में इसके दाम नीचे आ सकते हैं। सोमवार 24 अगस्त को नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ISMA के अध्यक्ष नीरज शिरगांवकर ने कहा कि हाल में चीनी की कीमतों में हुई बढ़ोतरी के पीछे कई कारण हैं। इनमें कारोबारियों और थोक खरीदारों की ओर से की गई स्पेकुलेटिव बाइंग यानी अनुमान के आधार पर ज्यादा खरीदारी और खराब मौसम के कारण चीनी उत्पादन में आई कमी प्रमुख हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चीनी मिलों ने कृत्रिम कमी पैदा करने या एक्स-मिल कीमतों को बढ़ाने में कोई भूमिका नहीं निभाई है।
ISMA के मुताबिक, सरकार की ओर से 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दिए जाने के बाद बाजार में कीमतों का दबाव कम होना शुरू हो गया है। संगठन के अध्यक्ष ने कहा कि भारत में चीनी की कमी जैसी कोई स्थिति नहीं है। उनके अनुसार सितंबर के अंत तक देश में करीब 35 लाख टन चीनी का क्लोजिंग स्टॉक मौजूद रहने का अनुमान है। इसका मतलब है कि घरेलू मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध रहेगा। यही वजह है कि आने वाले दिनों में बाजार में आपूर्ति बेहतर होने के साथ खुदरा कीमतों में भी नरमी देखने को मिल सकती है।
चीनी की नई पेराई का सीजन भी जल्द शुरू होने वाला है। ISMA के अनुसार, चीनी मिलों का संचालन लगभग 15 अक्टूबर से शुरू हो सकता है। अक्टूबर के दौरान मिलों से करीब 10-12 लाख टन चीनी उत्पादन होने का अनुमान है। दूसरी तरफ अक्टूबर महीने में देश की चीनी खपत करीब 24-25 लाख टन रहने की उम्मीद है। ऐसे में शुरुआती दौर में उत्पादन और मांग के बीच अंतर जरूर रहेगा, लेकिन मौजूदा स्टॉक और आयातित चीनी से बाजार की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है।
चीनी की कीमतों में हालिया तेजी का असर सीधे तौर पर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ा है। चाय, मिठाई, बेकरी और अन्य खाद्य उत्पादों की लागत पर भी इसका असर पड़ता है। ऐसे में अगर घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ती है और मिलों का नया उत्पादन शुरू होता है, तो खुदरा कीमतों में राहत मिल सकती है। हालांकि, वास्तविक कीमतों में गिरावट कितनी होगी, यह घरेलू उत्पादन, मांग, आयातित चीनी की उपलब्धता और बाजार की खरीदारी पर निर्भर करेगा। फिलहाल ISMA का संदेश यही है कि देश में चीनी की कमी नहीं है और घबराकर ज्यादा कीमत पर खरीदारी करने की जरूरत नहीं है।