यह अनुमति खास तौर पर Exim Code 170114 के तहत आने वाली रॉ शुगर पर लागू होगी। सरकार का उद्देश्य घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाना और बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण करना है। भारत दुनिया में चीनी की खपत करने वाले सबसे बड़े देशों में शामिल है, इसलिए घरेलू कीमतों में तेजी का सीधा असर करोड़ों उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है।
31 अक्टूबर तक मौका
सरकार ने उन कंपनियों के लिए भी विशेष प्रावधान किया है, जिनके पास SION E-52 के तहत एडवांस ऑथराइजेशन है। ऐसी कंपनियों को पहले से आयात की गई रॉ शुगर को नए TRQ सिस्टम में बदलने का एक बार मौका दिया गया है। इससे तैयार हो चुकी या भविष्य में तैयार होने वाली रिफाइंड चीनी को भी इस व्यवस्था में शामिल किया जा सकेगा। हालांकि, इसके लिए कंपनियों को आयात के समय मिली GST छूट की राशि का भुगतान करना होगा। साथ ही इस योजना के तहत आयातित रॉ शुगर से तैयार रिफाइंड चीनी को 31 अक्टूबर तक घरेलू बाजार में बेचना जरूरी होगा। DGFT बाद में इस कोटे के आवंटन और पुराने आयात को नई व्यवस्था में बदलने की प्रक्रिया से जुड़ी विस्तृत जानकारी जारी करेगा।
सरकार ने पहले क्या कदम उठाए?
चीनी की कीमतों पर नियंत्रण के लिए सरकार पहले भी कई कदम उठा चुकी है। 1 अगस्त से 30 नवंबर तक चीनी कारोबारियों पर स्टॉक रखने की सीमा लागू की गई है। इसका मकसद जमाखोरी और सट्टेबाजी पर रोक लगाना तथा बाजार में पर्याप्त सप्लाई बनाए रखना है। सरकार का कहना है कि मिलों से निकलने वाली चीनी की कीमतों में हालिया तेजी मौजूदा मांग और सप्लाई की स्थिति के हिसाब से उचित नहीं है। सरकार ने यह भी भरोसा दिलाया है कि देश में घरेलू जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त चीनी स्टॉक मौजूद है। ऐसे में 10 लाख टन ड्यूटी-फ्री रॉ शुगर आयात की अनुमति को बाजार में सप्लाई बढ़ाने और त्योहारी सीजन में उपभोक्ताओं को महंगी चीनी से राहत देने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
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