चीनी के थोक और फुटकर भाव
रिटेल प्राइस की बात करें तो दिल्ली में 1 किलो चीनी की कीमत 19 अगस्त को 64 रुपये, कानपुर, रांची, कोलकाता में 65 रुपये थी। जबकि, रायपुर और मुंबई में 64-64 रुपये। चीनी मिल मंडी पर दिए गए लेटेस्ट रेट के मुताबिक M-30 चीनी का थोक भाव दिल्ली में 6200 रुपये क्विंटल पर पहुंच गया है। 19 अगस्त के रेट के मुताबिक जीएसटी संग चीनी कानपुर में 6250, रायपुर में 6050, मुंबई में 6150, रांची में भी 6150 और कोलकाता में 6250 रुपये क्विंटल पर पहुंच गया है।
मोदी सरकार ने मिलों से मांगा 3 दिन का पूरा हिसाब
केंद्र सरकार ने चीनी मिलों से 17, 18 और 19 अगस्त 2026 को हुई चीनी की बिक्री का पूरा ब्योरा मांगा है। मिलों को हर बिक्री का कितना माल बिका, किस भाव पर बिका और किस तारीख को बिका, इसकी अलग-अलग जानकारी देनी होगी।
सरकार के निर्देश के मुताबिक, अगर एक ही दिन अलग-अलग खरीदारों को अलग-अलग भाव पर चीनी बेची गई है तो हर सौदे को अलग से दर्ज करना होगा। हर लेनदेन में खरीदार का नाम, पूरा पता, फोन या मोबाइल नंबर और GST नंबर भी देना अनिवार्य किया गया है।
मिलों को बिक्री की मात्रा क्विंटल में और कीमत रुपये प्रति क्विंटल में बतानी होगी। भेजी जाने वाली जानकारी पूरी, सही और संबंधित चीनी मिल द्वारा सत्यापित होनी चाहिए।
सख्त नियम लागू
सरकार ने 1 सितंबर से 30 नवंबर 2026 तक एक सख्त नियम लागू किया है, जो भी खरीदार या डीलर महीने में 10 मीट्रिक टन से ज्यादा चीनी का उपयोग करता है, वह अब 15 दिन से ज्यादा का स्टॉक नहीं रख सकेगा। दिलचस्प बात यह है कि जुलाई में पहले 30 दिन की सीमा लगाई गई थी, लेकिन जब कीमतें थमीं नहीं, तो सरकार ने अब यह अवधि आधी कर दी है ताकि बाजार में चीनी की आपूर्ति बनी रहे और बड़े कारोबारी मनमाना भंडारण करके दाम न बढ़ा सकें।
आज दोपहर तक भेजना होगा डेटा
सभी चीनी मिलों को यह जानकारी 20 अगस्त 2026 को दोपहर 12 बजे तक निर्धारित ईमेल sugarcontrol-fpd@nic.in पर भेजने का निर्देश दिया गया है। सरकार ने इस मामले को ‘MOST URGENT’ बताते हुए स्पष्ट किया है कि तय समय सीमा में जानकारी नहीं देने या देरी करने को गंभीरता से लिया जाएगा।
यह कदम ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब देश में चीनी की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। बिक्री के मात्रा और भाव के साथ खरीदारों की पूरी जानकारी मांगने से सरकार को बाजार में वास्तविक बिक्री कीमतों और कारोबार की स्थिति का विस्तृत आकलन करने में मदद मिल सकती है।
चीनी की कीमतें इस कदर आसमान क्यों छू रही हैं?
इसके पीछे त्योहारी डिमांड के अलावा मौसम का कहर भी है। कम बारिश और सूखे ने गन्ने की फसल को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिससे उत्पादन में कमी आने की आशंका है। सरकार इतना ही नहीं रुकी है, बल्कि उसने लगभग एक दशक में पहली बार ड्यूटी-फ्री आयात पर भी गंभीरता से विचार करना शुरू कर दिया है यानी अगर घरेलू आपूर्ति नहीं बढ़ी और कीमतें काबू में नहीं आईं तो विदेश से चीनी मंगाने का रास्ता खोला जा सकता है, जो अपने आप में एक बड़ा कदम है।
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