पाकिस्तान के लिए यह घटनाक्रम एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि वह अपने रक्षा निर्यात को विस्तार देने की दिशा में आगे बढ़ रहा था। हम आपको बता दें कि सूडान में पिछले तीन वर्षों से सेना और अर्धसैनिक बल रैपिड सपोर्ट फोर्स के बीच संघर्ष जारी है, जिसने गंभीर मानवीय संकट को जन्म दिया है। यह संघर्ष अब केवल आंतरिक नहीं रहा, बल्कि इसमें बाहरी शक्तियों की प्रतिस्पर्धा भी शामिल हो गई है। लाल सागर के किनारे स्थित और सोने के बड़े उत्पादक देश के रूप में सूडान का सामरिक महत्व काफी अधिक है।
इसे भी पढ़ें: Strategic Mission: NSA Ajit Doval की सऊदी अरब यात्रा, पश्चिम एशिया के तनाव के बीच अहम मुलाकात
इस पूरे घटनाक्रम में सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। वहां दोनों देश अलग अलग पक्षों के साथ जुड़े हुए माने जाते हैं। जहां सऊदी अरब सूडान की सेना के करीब है, वहीं अमीरात पर रैपिड सपोर्ट फोर्स को रसद सहायता देने के आरोप लगे हैं, हालांकि वह इन्हें खारिज करता रहा है। ऐसे में सऊदी अरब का इस सौदे से पीछे हटना यह संकेत देता है कि वह अफ्रीका में प्रत्यक्ष या परोक्ष संघर्षों से दूरी बनाना चाहता है।
रिपोर्टों के अनुसार कुछ पश्चिमी देशों ने भी सऊदी अरब को अफ्रीका में प्रॉक्सी संघर्षों से दूर रहने की सलाह दी थी। इसके बाद मार्च महीने में रियाद में सूडानी सेना और सऊदी अधिकारियों के बीच हुई बैठक के बाद इस समझौते के वित्त पोषण को समाप्त करने का निर्णय लिया गया।
देखा जाये तो इस घटनाक्रम का असर केवल सूडान तक सीमित नहीं है। पाकिस्तान और लीबिया के बीच प्रस्तावित लगभग चार अरब डॉलर का एक और रक्षा समझौता भी अब खतरे में बताया जा रहा है। इससे संकेत मिलता है कि सऊदी अरब अपनी क्षेत्रीय रणनीति की व्यापक समीक्षा कर रहा है और उन गतिविधियों से दूरी बना सकता है जो उसे जटिल संघर्षों में उलझा सकती हैं।
दूसरी ओर, भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल का सऊदी अरब दौरा ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ते तनाव ने वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। भारत की बड़ी मात्रा में तेल आपूर्ति खाड़ी देशों से आती है, इसलिए किसी भी व्यवधान का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। डोभाल की सऊदी नेतृत्व के साथ हुई बैठकों में द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ क्षेत्रीय हालात और भविष्य की चुनौतियों पर चर्चा हुई।
समग्र रूप से देखा जाए तो यह पूरा घटनाक्रम एक बड़े रणनीतिक बदलाव की ओर इशारा करता है। सऊदी अरब अपने क्षेत्रीय हस्तक्षेप को संतुलित करने की कोशिश कर रहा है, पाकिस्तान अपने रक्षा निर्यात के लक्ष्य में नई बाधाओं का सामना कर रहा है और भारत ऊर्जा सुरक्षा तथा कूटनीतिक सक्रियता के माध्यम से अपने हितों को सुरक्षित करने में जुटा है। सामरिक दृष्टि से यह स्थिति बहुध्रुवीय प्रतिस्पर्धा और बदलते शक्ति संतुलन का संकेत देती है, जहां हर देश अपने हितों को सुरक्षित रखने के लिए नई रणनीतियां अपना रहा है। आने वाले समय में इन निर्णयों का असर न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक स्तर पर भी देखने को मिलेगा।
Discover more from Hindi News Blogs
Subscribe to get the latest posts sent to your email.