Homemade Biscuit Business Success Story: मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के खेड़ी गांव की महिलाओं ने सेहतमंद बिस्किट बनाकर एक अनोखी मिसाल पेश की है. ये महिलाएं रागी और कुटकी जैसे मोटे अनाज से हेल्दी बिस्किट तैयार कर रही हैं, जिनमें मैदा और पाम ऑयल का इस्तेमाल नहीं किया जाता. बच्चों के लिए हेल्दी विकल्प खोजने की सोच से शुरू हुआ यह छोटा प्रयास अब एक छोटे उद्योग का रूप ले चुका है. गांव की 30 से ज्यादा महिलाएं इस काम से जुड़कर आत्मनिर्भर बन रही हैं. खास बात यह है कि गांव में बने ये बिस्किट अब भोपाल, इंदौर और उज्जैन जैसे शहरों तक पहुंच रहे हैं और लोगों को खूब पसंद आ रहे हैं.
बाजार में मिलने वाले ज्यादातर बिस्किट मैदा और पाम ऑयल से बनाए जाते हैं, जो लंबे समय तक सेहत के लिए अच्छे नहीं माने जाते. ऐसे में खंडवा जिले के एक छोटे से गांव की महिलाओं ने इसका देसी और हेल्दी विकल्प तैयार कर लिया है.
बच्चों के लिए शुरू किया नया प्रयोग
खंडवा जिले के खेड़ी गांव की रहने वाली अंतिम बाला पटेल ने इस पहल की शुरुआत की. उनका कहना है कि बच्चों को बिस्किट बहुत पसंद होते हैं, लेकिन बाजार में मिलने वाले ज्यादातर बिस्किट मैदा से बने होते हैं. इसी वजह से उन्होंने सोचा कि क्यों न ऐसा बिस्किट बनाया जाए जो स्वादिष्ट भी हो और सेहत के लिए भी फायदेमंद हो. इसी सोच के साथ उन्होंने ग्रामीण आजीविका मिशन के स्वयं सहायता समूह से जुड़कर काम शुरू किया.
अब 30 से ज्यादा महिलाएं जुड़ी
शुरुआत में इस काम से कुछ ही महिलाएं जुड़ी थीं, लेकिन धीरे-धीरे यह पहल बढ़ती गई. आज खेड़ी गांव में 30 से ज्यादा महिलाएं मिलकर रागी और कुटकी जैसे मोटे अनाज से बिस्किट तैयार कर रही हैं. महिलाएं पारंपरिक तरीके से आटा तैयार करती हैं और फिर अलग-अलग फ्लेवर के बिस्किट बनाती हैं. इन बिस्किटों की खास बात यह है कि इनमें मैदा या पाम ऑयल का इस्तेमाल नहीं किया जाता.
भोपाल-इंदौर तक पहुंच रहे गांव के बिस्किट
खेड़ी गांव में बने ये हेल्दी बिस्किट अब सिर्फ गांव तक सीमित नहीं हैं. इन्हें पैक करके भोपाल, इंदौर और उज्जैन जैसे बड़े शहरों में भी भेजा जा रहा है. इसके अलावा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी इनकी मांग धीरे-धीरे बढ़ रही है. महिलाओं का कहना है कि वे चॉकलेट फ्लेवर समेत कई तरह के बिस्किट तैयार करती हैं, जिन्हें बच्चे भी खूब पसंद कर रहे हैं.
आत्मनिर्भर बन रही गांव की महिलाएं
इस पहल से गांव की महिलाओं को रोजगार भी मिल रहा है और वे आत्मनिर्भर बन रही हैं. साथ ही लोगों को एक हेल्दी और देसी विकल्प भी मिल रहा है. अंतिम बाला पटेल बताती हैं कि उनका सपना है कि खेड़ी गांव में बने ये बिस्किट सिर्फ शहरों तक ही नहीं बल्कि आगे चलकर देश और विदेश तक अपनी पहचान बनाएं.
गांव से शुरू हुआ छोटा उद्योग
आज खेड़ी गांव की यह पहल ग्रामीण उद्यमिता का अच्छा उदाहरण बन गई है. गांव की महिलाएं मिलकर न सिर्फ हेल्दी प्रोडक्ट बना रही हैं बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत कर रही हैं. यह कहानी बताती है कि अगर सोच और मेहनत सही दिशा में हो तो गांव से भी बड़ा कारोबार शुरू किया जा सकता है.
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Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें
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