इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने के बाद मयूरी के सामने एक सुरक्षित और सुनहरा करियर था और उन्हें सालाना 5 लाख रुपये के पैकेज वाली कॉर्पोरेट नौकरी का ऑफर मिला था। आमतौर पर ज्यादातर लोग ऐसी नौकरी तुरंत स्वीकार कर लेते, लेकिन मायूरी ने अलग रास्ता चुना।
कौन है मयूरी और कहां तक की है पढ़ाई
महाराष्ट्र के निफाड तालुका के सोनगांव की रहने वाली मायूरी नितिन काले बचपन से ही पढ़ाई में होनहार थीं। टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक मयूरी नेइलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग (B.E.) की डिग्री हासिल की और अपने प्रोफेशनल करियर की शुरुआत करने की तैयारी कर ली थी। इंजीनियरिंग पूरी करने के कुछ समय बाद उनकी शादी हो गई। इसके बाद जब वह मां बनीं, तो उनकी जिम्मेदारियां और प्राथमिकताएं बदल गईं। ऐसे में उन्होंने कॉर्पोरेट नौकरी के बजाय परिवार और अपनी छोटी बेटी की परवरिश को प्राथमिकता दी। बाद में उन्होंने इसी फैसले को अपनी ताकत बनाकर खुद का कारोबार शुरू किया, जिसने उन्हें एक सफल महिला उद्यमी बना दिया।
5 लाख की नौकरी का ऑफर
अपने कौशल को और बेहतर बनाने के लिए मायूरी ने इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) डिजाइन का कोर्स भी किया। इस एक्स्ट्रा योग्यता का उन्हें फायदा मिला और जल्द ही उन्हें सालाना 5 लाख रुपये के पैकेज वाली एक कॉर्पोरेट नौकरी का ऑफर मिल गया। हालांकि, इस नौकरी के साथ एक बड़ी चुनौती भी थी। नौकरी के लिए उन्हें पुणे शिफ्ट होना पड़ता, जबकि उनकी छोटी बेटी और परिवार नासिक में थे। ज्यादातर लोग ऐसे मौके को बिना सोचे-समझे स्वीकार कर लेते, लेकिन मायूरी ने उस समय अपने करियर से ज्यादा परिवार को महत्व दिया। उन्होंने कॉर्पोरेट पद और आकर्षक पैकेज के बजाय अपनी बेटी और परिवार के साथ रहने का फैसला किया। यही निर्णय आगे चलकर उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ और इसी ने उन्हें एक सफल उद्यमी बनने की राह दिखाई।
छोटे से जूस आउटलेट ने बदल दी किस्मत
इसी दौरान मायूरी के पति ने उन्हें एक ऐसा सुझाव दिया, जिसने उनकी जिंदगी की दिशा ही बदल दी। उन्होंने कहा कि दूसरी नौकरी तलाशने के बजाय नासिक के कॉलेज रोड स्थित ‘जूस फार्म’ आउटलेट की जिम्मेदारी क्यों न संभाली जाए। यह फैसला आसान नहीं था। मायूरी ने इससे पहले कभी कोई बिजनेस नहीं चलाया था। उन्हें रिटेल सेक्टर का कोई अनुभव नहीं था और उनका परिवार भी कारोबारी पृष्ठभूमि से नहीं था। इसके बावजूद उन्होंने जोखिम उठाने का फैसला किया और उद्यमिता की दुनिया में कदम रख दिया।
फरवरी 2024 में मायूरी ने आधिकारिक तौर पर जूस आउटलेट की कमान संभाल ली। वह धीरे-धीरे कारोबार की बारीकियां सीख ही रही थीं कि एक और चुनौती सामने आ गई। उनके पति को काम के सिलसिले में ईरान जाना पड़ा, जिसके बाद पूरे बिजनेस की जिम्मेदारी लगभग अकेले मायूरी के कंधों पर आ गई। हालांकि, उन्होंने मुश्किल परिस्थितियों से हार नहीं मानी। आत्मविश्वास और मेहनत के दम पर उन्होंने कारोबार को संभाला और धीरे-धीरे उसे सफलता की नई ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया।
बिजनेस, घर और मां तीनों जिम्मेदारियां एक साथ निभाईं
मायूरी के लिए यह सफर बिल्कुल भी आसान नहीं था। सुबह से लेकर रात करीब 11 बजे तक वह जूस सेंटर पर ग्राहकों की देखभाल, स्टॉक, सप्लायर्स, हिसाब-किताब और रोजमर्रा के संचालन की जिम्मेदारी संभालती थीं। इसके बाद जब वह घर लौटतीं, तो घर का काम और अपनी छोटी बेटी की देखभाल उनका इंतजार कर रही होती। लगातार काम के कारण कई बार वह थक जाती थीं और खुद पर भी संदेह होने लगता था। लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय हर दिन खुद को पहले से बेहतर बनाने का लक्ष्य रखा। उन्होंने धीरे-धीरे स्टॉक का बेहतर प्रबंधन करना, ग्राहकों की पसंद को समझना, सेवा की गुणवत्ता सुधारना और समय का सही इस्तेमाल करना सीख लिया। मायूरी का मानना है कि किसी भी बिजनेस में सफल होने के लिए पहले से अनुभव होना जरूरी नहीं है। अनुशासन, निरंतर मेहनत और सीखने की इच्छा ही सफलता की सबसे बड़ी कुंजी होती है। यही सोच उनके छोटे से जूस आउटलेट को एक सफल कारोबार में बदलने की वजह बनी और आज उनका कारोबार सालाना 50 लाख रुपये की कमाई कर रहा है। मा
मायूरी की कहानी यह साबित करती है कि सफलता हमेशा सबसे सुरक्षित रास्ता चुनने से नहीं मिलती, बल्कि उस फैसले से मिलती है जो आपकी प्राथमिकताओं और जिम्मेदारियों के अनुरूप हो।
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