Success Story: जिद, हौसला और लगन से कठिनाईयों को हराना बहुत ही आसान है. छतरपुर के विकल्प चौरसिया ने इस बात को सच कर दिखाया है. दरअसल, विकल्प अपने भाई लिंकन के साथ सालों पहले कबाड़ खरीदने और बेचने का काम करते थे. लेकिन इसके बाद इन्होंने समोसा-जलेबी नाश्ता की दुकान खोली. जिसके बाद इनका बिजनेस चल गया और आज यह लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं और अच्छी कमाई भी कर रहे हैं. हम दोनों भाईयों ने कम लागत में सबसे पहले ठेला में समोसा लगाना शुरू किया. पूंजी इतनी नहीं थी कि दुकान किराए से लेकर धंधा कर सकें. 4 सालों तक ठेला में ही समोसा, जलेबी, मंगूड़ी, ब्रेड पकोड़ा और शिमला मिर्च बनाया. कंपटीशन बहुत था तो सालों की मेहनत बाद पूंजी इकट्ठी हुई और दुकान किराए से लेकर स्थाई दुकान कर ली. हमारी दुकान में हर दिन सैकड़ों की संख्या में कस्टमर आते हैं. यहां तक जो भी कस्टमर आता है तो मिनिमम 10 रुपए का तो नाश्ता करता ही है. इसलिए हर दिन 2 से 3000 रुपए की कमाई हो जाती है.
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