आज ही के दिन यानी की 13 जून को गजल के शहंशाह कहे जाने वाले मेहदी हसन का निधन हो गया था। मेहदी हसन की आवाज का जादू आज भी लोगों के सिर चढ़कर बोलता है। बता दें कि 60-70 के दशक की शायद ही ऐसी कोई फिल्म हो, जिसमें उन्होंने गाना न गाया हो। लेकिन उनको यह शोहरत इतनी आसानी से नहीं मिली। मेहदी हसन के जीवन में एक समय ऐसा भी था, जब उनको अपने वजूद के लिए लड़ना पड़ा। देश के बंटवारे ने उनको न सिर्फ आर्थिक बल्कि मानसिक रूप से भी तोड़ दिया था। लेकिन उन्होंने मुश्किल परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी। तो आइए जानते हैं उनकी डेथ एनिवर्सरी के मौके पर मेहदी हसन के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में…
जन्म और परिवार
राजस्थान के झुंझनू जिले के लूना गांव में 18 जुलाई 1927 को मेहदी हसन का जन्म हुआ था। वह बचपन से ही संगीत में दिलचस्पी रखते थे। उनके पिता का नाम उस्ताद अजीम खान था। पिता और चाचा ने मेहदी हसन को 8 साल की उम्र से संगीत की शिक्षा देना शुरूकर दिया था। जब वह 18 साल के हुए, तो ठुमरी, ध्रुपद और खयाल गायकी में मास्टर हो चुके थे।
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बंटवारे में हुए बर्बाद
साल 1947 में जब देश का बंटवारा हुआ, तो मेहदी 20 साल के थे। वह अपने करियर की शुरूआत कर पाते कि इससे पहले देश के दो टुकड़े हो गए और उनको अपने परिवार के साथ पाकिस्तान जाना पड़ा। पाकिस्तान के पंजाब में साहीवाल जिले के एक गांव में वह रहने लगे। इस दौरान परिवार की आर्थिक स्थिति खराब हो गई। मजबूरी में मेहदी हसन को साइकिल की दुकान पर मैकेनिक का काम करना पड़ा। लेकिन इस दौरान उन्होंने रियाज करना नहीं बंद किया। मेहदी हसन का संघर्ष करीब 10 सालों तक जारी रहा।
गजल गायकी
साल 1957 में मेहदी हसन को रेडियो पाकिस्तान पर गाने का मौका मिला। शुरूआत में मेहदी हसन ठुमरी गाते थे। जिसको काफी पसंद किया जाता था। इसके बाद जब उन्होंने गजल गायकी में हाथ आजमाया, तो उनको बड़ी शोहरत मिली। पाकिस्तान के अलावा उन्होंने भारतीय फिल्मों में भी गाने गाए हैं। मेहदी हसन ने कई भारतीय सिंगरों के साथ जुगलबंदी की थी, जिनमें लता मंगेशकर का नाम भी शामिल है। वैसे तो मेहदी हसन पाकिस्तानी सिंगर कहलाए, लेकिन उनको भारत और नेपाल की सरकारों ने भी सम्मानित किया।
मृत्यु
आखिरी समय में मेहदी हसन काफी ज्यादा बीमार रहने लगे थे। वहीं 13 जून 2012 को मेहदी हसन का कराची में निधन हो गया था।
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