इंग्लैंड ने आगामी पाकिस्तान टेस्ट सीरीज से पहले जो रूट को टीम का कप्तान नियुक्त किया है, जबकि स्टीफन फ्लेमिंग इंग्लैंड टीम के मुख्य कोच बनाए गए हैं।
फ्लेमिंग ने छोड़ी दी CSK की कोचिंग
इस महीने की शुरुआत में चेन्नई सुपर किंग्स (सीएसके) से अलग होने के बाद फ़्लेमिंग ने इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) के साथ चार साल का अनुबंध किया है। उनका यह कार्यकाल सितंबर 2030 के अंत तक जारी रहेगा। न्यूजीलैंड के पूर्व कप्तान फ्लेमिंग इंग्लैंड की क्रिकेट से भली-भांति परिचित हैं। खिलाड़ी के रूप में उन्होंने मिडिलसेक्स, यॉर्कशर और नॉटिंघमशर का प्रतिनिधित्व किया था। 2005 में उन्होंने नॉटिंघमशर को काउंटी चैंपियनशिप का खिताब भी जिताया था। इसके अलावा वह द हंड्रेड में सदर्न ब्रेव के मुख्य कोच भी रह चुके हैं।
फ़्लेमिंग का ब्रेंडन मैकुलम के साथ भी काफी करीबी रिश्ता है। मैकुलम को टेस्ट टीम के मुख्य कोच पद से हटाया जा चुका है, लेकिन वह सीमित ओवरों की टीम के कोच बने रहेंगे। दोनों लंबे समय से क़रीबी दोस्त होने के साथ-साथ बिज़नेस साझेदार भी हैं।
पाकिस्तान सीरीज का नहीं रहेंगे हिस्सा
हालांकि, 53 वर्षीय फ्लेमिंग पाकिस्तान के खिलाफ होने वाली आगामी तीन टेस्ट मैचों की सीरीज के दौरान टीम के साथ नहीं होंगे। उस सीरीज़ में मार्कस ट्रेस्कोथिक अंतरिम मुख्य कोच की भूमिका निभाएंगे। सीएसके के साथ 18 साल का लंबा सफ़र समाप्त होने के बाद फ़्लेमिंग फ़िलहाल अपने परिवार के साथ समय बिता रहे हैं। वह इस गर्मियों के अंत में इंग्लैंड पहुंचेंगे और दिसंबर में शुरू होने वाले दक्षिण अफ़्रीका दौरे की तैयारियों की कमान संभालेंगे।
मुख्य कोच बनने के साथ ही फ़्लेमिंग का पहला बड़ा फ़ैसला जो रूट को टेस्ट टीम की कप्तानी सौंपना रहा। न्यूज़ीलैंड सीरीज़ के बाद बेन स्टोक्स के अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद रूट को इस गर्मी के बाक़ी टेस्ट मैचों के लिए अल्पकालिक विकल्प माना जा रहा था। ईसीबी लंबे समय के कप्तान के तौर पर रूट और सीमित ओवरों के कप्तान हैरी ब्रूक में से किसी एक पर फ़ैसला करना चाहता था।
लेकिन मंगलवार को बोर्ड ने घोषणा कर दी कि इंग्लैंड के लिए टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले रूट एक बार फिर पूर्णकालिक कप्तान होंगे। इससे पहले उन्होंने 2017 से 2022 के बीच रिकॉर्ड 64 टेस्ट मैचों में इंग्लैंड की कप्तानी की थी।
इस गर्मी में न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ दूसरे टेस्ट में भी रूट को अचानक कप्तानी की ज़िम्मेदारी दी गई थी। पहले टेस्ट के बाद टीम कर्फ़्यू का उल्लंघन करने और चेल्सी के एक नाइटक्लब में हुई घटना के कारण बेन स्टोक्स को बाहर बैठना पड़ा था।
उस समय रूट ने कहा था कि कप्तानी छोड़ने के बाद अब वह मानसिक रूप से पहले से बिल्कुल अलग स्थिति में हैं। उन्होंने माना था कि अपने पहले कार्यकाल में कप्तानी का दबाव उन पर काफ़ी भारी पड़ा था। हालांकि, द ओवल टेस्ट में उनकी वापसी सफल नहीं रही। अनुभवहीन इंग्लैंड टीम को 253 रन से हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद न्यूज़ीलैंड ने सीरीज़ बराबर की और फिर ट्रेंट ब्रिज में तीसरा टेस्ट जीतकर सीरीज़ भी अपने नाम कर ली।
बेन स्टोक्स ने पिछले महीने अपने अचानक संन्यास के बाद अपने उपकप्तान हैरी ब्रूक का समर्थन किया था। हालांकि ब्रूक पहले से ही इंग्लैंड की सीमित ओवर टीमों के कप्तान हैं और ईसीबी अंतरिम आधार पर यह जिम्मेदारी फिर से जो रूट को सौंपने पर भी विचार कर रहा है। कोचिंग के अन्य दावेदारों में टॉम मूडी, रिचर्ड डॉसन और जोनाथन ट्रॉट के नाम भी शामिल थे, लेकिन फ्लेमिंग सबसे मजबूत दावेदार बनकर उभरे।
35 वर्षीय रूट 2017 से 2022 तक इंग्लैंड के पूर्णकालिक टेस्ट कप्तान थे। उन्होंने 65 टेस्ट में इंग्लैंड की अगुवाई की है और उनकी कप्तानी में इंग्लैंड ने 27 मैच जीते जबकि 27 में उन्हें हार मिली। लेकिन पिछले 18 टेस्ट मैचों में कप्तानी करते हुए रूट को एक ही जीत हासिल हुई है। बेन स्टोक्स की अनुपस्थिति में पिछले महीने द ओवल में उन्होंने कप्तानी की लेकिन टीम को 253 रनों से हार का सामना करना पड़ा।
इंग्लैंड को ऐशेज से पहले दस टेस्ट मैच खेलने हैं। इनमें पाकिस्तान के खिलाफ तीन (अगस्त-सितंबर), दक्षिण अफ्रीका में तीन (दिसंबर-जनवरी), बंगलादेश में दो (फरवरी), मेलबर्न में 150वीं वर्षगांठ टेस्ट (मार्च) और मई में घरेलू मैदान पर बंगलादेश के खिलाफ एक टेस्ट शामिल है। इंग्लैंड ने इस ऐशेज सीरीज को खास लक्ष्य बनाया है, क्योंकि उन्होंने आखिरी बार 2015 में ऐशेज जीती थी।
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