दोनों पक्षों को पर लगा कितना जुर्माना?
दिल्ली स्थित एनसीएलटी की विशेष पीठ ने स्पाइसजेट और एविएटर एमएल को 7.5-7.5 लाख रुपये जमा करने को कहा है. ये रकम प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष में जमा करनी होगी. दोनों पक्षों को 7 दिन में भुगतान का प्रमाण न्यायाधिकरण के पंजीकरण कार्यालय में देना होगा. ऐसा नहीं करने पर मामला दोबारा सुनवाई के लिए लगाया जा सकता है.
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58.64 करोड़ रुपये से जुड़ा क्या था मामला?
एविएटर एमएल ने साल 2024 में दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता की धारा 9 के तहत स्पाइसजेट के खिलाफ याचिका दायर की थी. इसमें 58.64 करोड़ रुपये के बकाये का दावा किया गया था. ये मामला उन कई याचिकाओं में शामिल था, जिन्हें विमान पट्टेदार कंपनियों ने स्पाइसजेट से बकाया रकम की वसूली के लिए दायर किया था.
क्यों नाराज था न्यायाधिकरण?
दरअसल, एनसीएलटी इस मामले में आदेश सुनाने की तैयारी कर चुका था. इसी बीच स्पाइसजेट और एविएटर एमएल ने आपसी समझौते की जानकारी दे दी. बस फिर न्यायाधिकरण ने इस पर नाराजगी जताई क्योंकि मामले की सुनवाई पूरी हो चुकी थी और आदेश के लिए इसे सुरक्षित रखा गया था. अदालत का मानना था कि इस तरह आखिरी समय में समझौते की जानकारी देने से न्यायिक समय और संसाधनों की बर्बादी हुई है.
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क्या दिवाला कार्रवाई का खतरा टल गया?
दिवाला कार्यवाई का खतरा अभी तक पूरी तरह नहीं टला है. एविएटर एमएल की याचिका वापस होने से एक मामले में स्पाइसजेट को राहत मिली है, लेकिन कंपनी के खिलाफ सात दूसरी दिवाला याचिकाएं अभी बाकी हैं. एनसीएलटी ने इन मामलों पर पहले सुरक्षित रखे गए आदेश वापस ले लिए हैं और अब इन्हें नियमित पीठ के सामने नए सिरे से सुना जाएगा. यानी अभी स्पाइसजेट के लिए संकट पूरी तरह खत्म से नहीं हुआ है.
स्पाइसजेट ने एनसीएलटी के फैसले का स्वागत किया है और कहा है कि यह लंबित मामलों को सुलझाने की दिशा में सकारात्मक कदम है. कंपनी फिलहाल अपने कामकाज और विमान बेड़े को मजबूत करने पर भी ध्यान दे रही है.
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