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Iran us war news: अमेरिका की ओर से ईरान के युद्धपोत IRIS डेना को जिस तरह से अमेरिका ने डुबोया है, उसके बाद खतरा ईरान के ही एक और जहाज पर मंडराने लगा है. ये जहाज ईरानी मिलिट्री टैंकर बुशैर है, जो कोलंबो तट पर खड़ा है. जिस तरह से युद्ध बढ़ रहा है, उसके बाद ये डर है कि अमेरिका कहीं इस टैंकर को भी अपनी जद में न ले ले.
ईरान का एक और जहाज है कोलंबो में. (सांकेतिक तस्वीर)
यह हमला उस जहाज पर हुआ जो कुछ हफ्ते पहले भारत के MILAN 2026 और इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू 2026 में भाग लेकर वापस लौट रहा था. अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इसे 1945 के बाद पहली बार ऐसा हमला बताया जब एक अमेरिकी पनडुब्बी ने टॉरपीडो से दुश्मन के जहाज को डुबोया. जिसके बाद अब सभी की निगाहें एक और ईरानी सैन्य टैंकर बुशैर पर है, जो इसी इलाके में तैनात है. जिस तरह से अमेरिका ने ईरान के एक युद्धपोत को निशाना बनाया है, उसके खतरा ईरानी टैंकर बुशियर पर भी मंडराने लगा है.
जहां डूबा IRIS डेना, वहीं खड़ा है दूसरा टैंकर
ईरान का एक जहाज तो अमेरिका श्रीलंका के पास हिंद महासागर में डुबो चुका है, इसके बाद ये युद्ध एक दूसरी दिशा पकड़ता हुआ नजर आ रहा है. अमेरिका के दावे के बाद ईरान के विदेश मंत्री ने कहा है कि जिस युद्धपोत को डुबोया गया है, वो भारतीय नौसेना का मेहमान था. ऐसे में अमेरिका को इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी. अब नजरें ईरान के एक दूसरे सैन्य टैंकर पर है, जिसका नाम बुशियर है और ये कोलंबो पोर्ट के बाहरी एंकरिंग क्षेत्र से करीब 10 समुद्री मील के भीतर श्रीलंका के क्षेत्रीय जल में खड़ा है. कुछ रिपोर्टों में कहा जा रहा है कि अमेरिका इस टैंकर को भी निशाना बना सकता है, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ सकता है.
क्यों मंडराया बुशैर पर खतरा?
अब तक की जंग में अमेरिका ने ईरान के 17 जंगी जहाजों को ईरान के ही अलग अलग पोर्ट पर हमला कर तबाह किया है. इसमें रूसी किलो-क्लास पनडुब्बी भी शामिल थी. ऐसा जंगी जहाजों और इंटरनेशनल शिपिंग के लिए ईरानी समुद्री खतरे को कम करने की कोशिश में किया गया था. जब ईरानी जहाज डुबोया गया तो यह अंतर्राष्ट्रीय जल में था. इसके अलावा ईरानी युद्धपोत अपने जंगी जहाजों से बिना सोचे समझे होर्मुज स्ट्रेट्स में दूसरे जहाजों पर हमले कर रहा है. कई बार ऐसे में खुद ही युद्धपोत टार्गेट बन जाते हैं. ऐसे में ये खतरा बुशैर पर भी मंडरा रहा है.
यह हमला क्यों हुआ?
हाल के दिनों में ईरान की ओर से युद्धपोतों, टैंकरों से लॉन्च किए गए ड्रोन और मिसाइल हमलों की रिपोर्टें आई हैं, जिनमें कई बार नागरिक निशानों को भी लक्ष्य बनाने की कोशिश गई है. अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक इसी वजह से IRIS डेना को मारना वैध है, हालांक ईरान का दावा है कि ये बिना वॉर्निंग के लिए किया गया हमला है और ये युद्धपोत कई देशों के सैन्य अभ्यास में हिस्सा लेने के बाद वापस ईरान लौट रहा था.
क्या है युद्ध के हालात?
ईरान की सर्वोच्च नेतृत्व खामेनेई पर 28 फरवरी को हुए हमलों में गंभीर चोटें लगीं, जिससे इसका नेतृत्व कमजोर हुआ महसूस कर रहा है. अब वह संघर्ष को बढ़ाते हुए खाड़ी देशों संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और तुर्की को भी अमेरिका के पक्ष में खड़े होने पर चेतावनी दे रहा है. ईरान का कहना है कि अगर कोई देश अमेरिका के साथ है तो उसे या तो हमलों का सामना करना होगा या फिर अमेरिका की सेनाओं को अपने देश से हटाना होगा. यही वजह है कि वो खाड़ी देशों पर धड़ाधड़ हमले कर रहा है. ईरान के प्रमुख सहयोगी चीन और रूस अब तक इस संघर्ष में सीधे शामिल नहीं हुए हैं. चीन की एक नौसेना टास्क फोर्स गल्फ ऑफ अदन में है और रूस के कई युद्धपोत अगले महीने हिंद महासागर क्षेत्र में आने वाले हैं. बावजूद इसके कोई भी अपने सेना उसके लिए नहीं भेज रहा है.
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News18 में इंटरनेशनल डेस्क पर कार्यरत हैं. टीवी पत्रकारिता का भी अनुभव है और इससे पहले Zee Media Ltd. में कार्य किया. डिजिटल वीडियो प्रोडक्शन की जानकारी है. टीवी पत्रकारिता के दौरान कला-साहित्य के साथ-साथ अंतरर…और पढ़ें
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