जैसे-जैसे कर्मचारी की सैलरी बढ़ती है, उसका सीटीसी भी बढ़ जाता है। अगर किसी कंपनी में री-स्ट्रक्चरिंग या छंटनी का दौर शुरू होता है, तो ज्यादा सीटीसी वाले पदों पर भी इसका असर पड़ सकता है।
20-30 हजार रुपये की हाइक के लिए नौकरी बदलना जरूरी?
पाटिल ने कहा कि इस लेवल पर कोई व्यक्ति 20 से 30 हजार रुपये ज्यादा सैलरी के लिए नौकरी बदल सकता है, लेकिन टैक्स कटने के बाद हाथ में आने वाली बढ़ी हुई रकम उतनी बड़ी नहीं होती। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या मामूली हाइक के लिए मौजूदा नौकरी से मिलने वाली दूसरी सुविधाओं और फायदे को छोड़ना सही है?
उन्होंने कहा कि नौकरी बदलने का मतलब केवल कंपनी बदलना नहीं है। इसके साथ व्यक्ति को उस जगह को भी छोड़ना पड़ सकता है, जहां उसने अच्छी पहचान बनाई है, अच्छे प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है और एक बेहतर मैनेजर व सहकर्मियों के साथ सहज माहौल में काम कर रहा है।
ज्यादा सीटीसी के साथ छंटनी का रिस्क भी
पाटिल ने एक और अहम पहलू की ओर लोगों का ध्यान दिलाया, और वह है कंपनी में छंटनी या री-स्ट्रक्चरिंग का जोखिम। उनका कहना है कि जैसे-जैसे कर्मचारी की सैलरी बढ़ती है, उसका सीटीसी भी बढ़ जाता है। अगर किसी कंपनी में री-स्ट्रक्चरिंग या छंटनी का दौर शुरू होता है, तो ज्यादा सीटीसी वाले पदों पर भी इसका असर पड़ सकता है। उनका कहना है कि अगर कोई व्यक्ति अपनी मौजूदा कंपनी में अच्छा प्रदर्शन कर रहा है, काम का माहौल अच्छा है और नौकरी स्थिर है, तो सिर्फ थोड़ी सी सैलरी बढ़ोतरी के लिए नौकरी बदलने से पहले दोबारा अच्छे से विचार करना चाहिए।
जॉब के बाद इन चीजों पर करें फोकस
पाटिल ने प्रोफेशनल्स को एक और सलाह दी। उनका कहना है कि जब आपकी 9 से 5 की नौकरी स्थिर हो जाए, तो ऑफिस के बाद के समय का इस्तेमाल नई स्किल सीखने, अपना कुछ शुरू करने या इनकम का दूसरा सोर्स तैयार करने में किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि एक समय के बाद करियर का लक्ष्य सिर्फ नौकरी से ज्यादा से ज्यादा सैलरी हासिल करना नहीं होना चाहिए। इसके बजाय ऐसी जिंदगी बनाने पर ध्यान देना चाहिए, जहां पूरी आय सिर्फ नौकरी पर निर्भर न हो।
सोशल मीडिया पर लोगों ने क्या कहा?
निहार पाटिल की इस पोस्ट पर यूजर्स की कई कमेंट्स भी आईं। ज्यादातर लोगों ने उनके तर्क से सहमति जताई। एक यूजर ने लिखा, “यह बात वाकई समझ में आती है।” दूसरे ने कहा, हर सैलरी हाइक के लिए नौकरी बदलना जरूरी नहीं है। वहीं, एक और यूजर ने कहा, मन की शांति की भी अपनी कीमत होती है।
डिस्क्लेमर: इस कहानी में किए गए सभी दावे और विचार संबंधित व्यक्ति के निजी अनुभव हैं। ‘लाइव हिंदुस्तान’ वेबसाइट सोशल मीडिया पोस्ट पर किए गए इन दावों की पुष्टि नहीं करती है।
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