भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली देखने को मिली है. एक दिन में FIIs ने हजारों करोड़ रुपये के शेयर बाजार से निकाल लिए. हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने खरीदारी करके बाजार को सहारा देने की कोशिश की. वैश्विक तनाव और बढ़ती तेल कीमतों के कारण निवेशकों का रुख सतर्क बना हुआ है.
FIIs ने 9,366 करोड़ की बिकवाली की, घरेलू संस्थाओं ने संभाला बाजार. (Image:News18)
विदेशी निवेशकों की बड़ी बिकवाली
ताजा आंकड़ों के अनुसार विदेशी निवेशकों ने दिनभर के कारोबार में करीब 22,708 करोड़ रुपये के शेयर बेचे और लगभग 12,730 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे. इस तरह उनका कुल शुद्ध निवेश नकारात्मक रहा और बाजार से 9,366 करोड़ रुपये की निकासी हुई. यह अक्टूबर 2025 के बाद की सबसे बड़ी बिकवाली मानी जा रही है. वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों ने कुल 25,150 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे और 12,557 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जिससे उनकी शुद्ध खरीदारी 12,593 करोड़ रुपये रही.
2026 में बाजार पर दबाव बढ़ा
इस साल की शुरुआत से ही भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बना हुआ है. प्रमुख सूचकांक Nifty 50 में साल की शुरुआत से अब तक 11 प्रतिशत से ज्यादा गिरावट आ चुकी है. वहीं मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांक भी करीब 10 प्रतिशत तक नीचे आ चुके हैं. मार्च महीने में भी बाजार में तेज गिरावट देखने को मिली है और सूचकांक में करीब 8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जो महामारी के दौर के बाद सबसे बड़ी मासिक गिरावट मानी जा रही है.
वैश्विक तनाव और तेल की कीमतों का असर
विशेषज्ञों के मुताबिक पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई है, जिससे महंगाई और चालू खाते के घाटे को लेकर चिंता बढ़ रही है. भारत अपनी जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर अर्थव्यवस्था और बाजार पर पड़ता है.
आगे भी बनी रह सकती है बाजार में अस्थिरता
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में बाजार की दिशा वैश्विक घटनाओं पर काफी हद तक निर्भर करेगी. खास तौर पर पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और विदेशी निवेशकों के रुख से बाजार की चाल तय होगी. अगर तनाव कम होता है और विदेशी निवेश फिर से लौटते हैं तो बाजार में सुधार देखने को मिल सकता है, लेकिन अगर अनिश्चितता बनी रहती है तो निवेशकों को अभी और उतार-चढ़ाव के लिए तैयार रहना पड़ सकता है.
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Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. International affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in …और पढ़ें
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