क्यों चंद्रशेखरन ने दोबारा नियुक्ति से किया इनकार?
द इकनॉमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक, चंद्रशेखरन का यह फैसला उस समय आया जब उनके पांच साल के विस्तारित कार्यकाल को लेकर सर्वसम्मति नहीं बन पाई। हालांकि, सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट ने सर्वसम्मति से उनके कार्यकाल बढ़ाने की सिफारिश की थी। टाटा संस की नामांकन एवं पारिश्रमिक समिति और बोर्ड ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया था।
24 फरवरी को टाटा संस के बोर्ड में यह प्रस्ताव रखा गया, लेकिन “एक बोर्ड सदस्य के विरोध के कारण यह प्रस्ताव पास नहीं हो सका।” चंद्रशेखरन ने कहा कि “सर्वसम्मति के अभाव में मैंने निर्णय को टाल दिया।” छह महीने बीत जाने के बाद भी यह मामला अनसुलझा रहा।
चंद्रशेखरन का मानना है कि टाटा संस एक बहुत बड़ा संस्थान है और कई रणनीतिक परियोजनाएं महत्वपूर्ण चरण में हैं। उन्होंने कहा, “न केवल फरवरी 2027 के बाद ग्रुप को लीड करने के लिए एक लीडर का होना आवश्यक है, बल्कि नेतृत्व को लेकर स्पष्टता कर्मचारियों, निवेशकों, भागीदारों और अन्य हितधारकों के लिए भी महत्वपूर्ण है।” इसके बाद उन्होंने बोर्ड को सूचित किया कि वे पुनः नियुक्ति के लिए खुद को पेश नहीं करेंगे और बोर्ड से जल्द उत्तराधिकार तय करने का आग्रह किया, ताकि उचित संक्रमण सुनिश्चित हो सके।
ट्रस्ट ने जताया आभार और दिया सहयोग का भरोसा
सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट ने चंद्रशेखरन के फैसले का सम्मान करते हुए उनके योगदान के लिए धन्यवाद दिया। ट्रस्ट ने कहा, “हम ग्रुप में महत्वपूर्ण बदलाव, विकास और परिवर्तन की अवधि में उनके अमूल्य योगदान के लिए आभारी हैं।” साथ ही, ट्रस्ट ने नेतृत्व परिवर्तन के दौरान टाटा संस को पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया।
टाटा ग्रुप के सामने क्या चुनौतियां हैं?
चंद्रशेखरन का जाना ऐसे समय में हो रहा है, जब टाटा ग्रुप एविएशन, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, डिजिटल बिजनेस और अन्य नए क्षेत्रों में निवेश और विस्तार कर रहा है। अगले चेयरमैन को एयर इंडिया और जगुआर लैंड रोवर जैसे व्यवसायों की बागडोर संभालनी होगी, जबकि टीसीएस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की ओर बदलाव का सामना कर रहा है। समूह की सेमीकंडक्टर और अपग्रेडेड मैन्युफैक्चरिंग प्रोजेक्ट अभी डेवलप होने के स्टेज में हैं।
इसके अलावा, टाटा ट्रस्ट और टाटा संस के बीच तनाव भी चर्चा का विषय रहा है। टाटा ट्रस्ट के पास टाटा संस की लगभग 66% हिस्सेदारी है। चंद्रशेखरन के कार्यकाल में टाटा ग्रुप का रेवेन्यू 13.3 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचा, और मार्केट वैल्यू तथा मुनाफे में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई। ऐसे में नए चेयरमैन का चयन न केवल नेतृत्व बल्कि इन निवेशों और व्यवसायों के भविष्य को भी तय करेगा।
उत्तराधिकारी की तलाश
अभी चंद्रशेखरन 20 फरवरी 2027 तक चेयरमैन पद पर बने रहेंगे। एसडीटीटी द्वारा चयन समिति के गठन का निर्णय उत्तराधिकारी खोजने की दिशा में पहला औपचारिक कदम है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि कौन सा चेहरा टाटा समूह की कमान संभालेगा, और वह किस दिशा में समूह को आगे बढ़ाएगा।
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