चीन में तलाक तेजी से बढ़े हैं। खासकर महिलाओं की ओर से तलाक की मांग रिकॉर्ड स्तर पर है। समाजशास्त्री कहते हैं कि तलाक की बढ़ती प्रवृत्ति का एक बड़ा कारण महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता और सामाजिक स्वीकृति में बढ़ोतरी है। शहरों में रहने वाली आधुनिक महिलाएं अब ‘खराब रिश्तों से बाहर निकलने’ के लिए तलाक का विकल्प चुन रही हैं, बजाय समाज के दबाव में जीवन गुजारने के। वहीं सरकार ने तलाक को चुनौतीपूर्ण बनाने के लिए ‘कूलिंग-ऑफ’ नियम लागू किया है, जिसमें तलाक तुरंत मंजूर नहीं होता। इसके बावजूद तलाक के केस बढ़ रहे हैं। आंकड़ों से पता चलता है कि 2025 में सहमति से हुए तलाक की संख्या 5 साल में सबसे ज्यादा थी, जब 27 लाख से ज्यादा तलाक दर्ज हुए। यह 2021 की तुलना में 28% अधिक है। तलाक के करीब 70% केस महिलाएं दायर कर रही हैं। वहीं, 1980 के बाद विवाह दर में ऐतिहासिक गिरावट आई। पिछले 44 साल में सबसे कम शादियां हुई। ‘सिंगल’ रहना नया स्टेटस सिंबल बन रहा है। आर्थिक मंदी और पारिवारिक संरचना में बदलाव ने इस प्रवृत्ति को और तेज किया है। समाज वैज्ञानिकों के अनुसार, यह बदलाव चीनी समाज में ‘पारंपरिक परिवार मॉडल’ के अंत और ‘निजी आजादी’ की ओर एक बड़ा कदम दर्शाता है।’ अब महिलाएं अपनी अलग पहचान और आत्मसम्मान के लिए तलाक को नए सामाजिक अधिकार की तरह देख रही हैं। यह सामाजिक बदलाव और महिलाओं के बढ़ते अधिकारों का संकेत है। अब बराबरी, सम्मान व पसंद-नापसंद को लेकर मुखर चीन की सरकार ने 2021 में नया नियम 30 दिन का ‘कूलिंग-ऑफ पीरियड’ लागू किया। यानी तलाक रजिस्ट्रेशन से पहले 30 दिन की अनिवार्य ‘सोचने की मोहलत’ रखी गई। इससे शुरुआत में तलाक घटे, लेकिन फिर बढ़ गए। महिलाएं रिश्तों में बराबरी, सम्मान और पसंद-नापसंद को लेकर पहले से ज्यादा मुखर हैं। शंघाई में फैमिली लॉ की वकील गुई फांगफांग बताती हैं, ‘पहले महिलाएं तलाक के लिए आम तौर पर बड़े अत्याचारों का हवाला देती थीं। जैसे- घरेलू हिंसा, विवाहेतर संबंध या जुए जैसी गैर-जिम्मेदार आदतें। अब महिलाएं कारण बताती हैं- ‘शादी की क्वालिटी अच्छी नहीं’ या ‘हमारे मूल्य मेल नहीं हो पा रहे हैं।’
Discover more from Hindi News Blogs
Subscribe to get the latest posts sent to your email.