उत्तर प्रदेश के संत कबीरनगर जिले में समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद लक्ष्मीकांत उर्फ पप्पू निषाद के खिलाफ अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कराने वाले व्यक्ति को उसके कथित अपहरण के 24 घंटे के भीतर छुड़ा लिया गया। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी। अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने इस घटना के सिलसिले में चार लोगों को गिरफ्तार भी किया है।
पुलिस अधीक्षक (एसपी) संदीप कुमार मीणा ने बताया कि पीड़ित विशाल कुमार को आरोपी अशोक यादव ने निषाद के आवास पर यह कहकर बुलाया था कि सपा सांसद के निजी सहायक धमेंद्र यादव उससे किसी मुद्दे पर बात करना चाहते हैं। मीणा के मुताबिक, विशाल के निषाद के आवास पर पहुंचने के बाद उसका मोबाइल फोन बंद हो गया, जिसके मद्देनजर उसके भाई ओम प्रकाश ने रविवार को बखिरा थाने में शिकायत दर्ज कराई। मीणा ने बताया कि पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर विशाल की तलाश शुरू की।
उन्होंने बताया कि पुलिस की एक टीम ने गुप्त सूचना पर कार्रवाई करते हुए 20-21 सितंबर की दरमियानी रात करीब ढाई बजे खलीलाबाद में एक कार को रोका और विशाल को छुड़ाकर वाहन में सवार चार अन्य लोगों को गिरफ्तार कर लिया। मीणा के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान विश्वकेतु यादव, अशोक यादव, निषाद के निजी सहायक धर्मेंद्र यादव और बस्ती जिले के निवासी जितेंद्र यादव के रूप में हुई है। उन्होंने बताया कि पूछताछ के दौरान विश्वकेतु ने पुलिस को बताया कि गणेश प्रतिमा विसर्जन के दौरान हुए विवाद से जुड़े मामले में विशाल ने उसका और निषाद का नाम लिया था।
मीणा ने बताया कि आरोपी विशाल को सांसद के आवास पर ले गए और उससे नोटरी के सामने दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाए। उन्होंने बताया कि आरोपियों की योजना विशाल को अयोध्या ले जाकर उसकी हत्या करने और शव को ठिकाने लगाने की थी, लेकिन इससे पहले कि वे अपनी योजना को अंजाम दे पाते, पुलिस ने उनकी गाड़ी को रोक लिया। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि मामले की जांच जारी है।
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