अदालत को हल्के में लेने पर फटकार
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया। जजों ने कहा कि समय रैना ने “अदालत को हल्के में लिया है” और बिना किसी डर के कोर्ट के आदेशों का खुलेआम उल्लंघन किया है। कोर्ट इस बात से बेहद नाराज था कि उनके पिछले निर्देशों को गंभीरता से नहीं लिया गया।
लगाया 3-3 लाख रुपये का जुर्माना
सुप्रीम कोर्ट ने अपने पिछले आदेशों का पालन न करने के कारण समय रैना और इस मामले से जुड़े अन्य सभी लोगों पर 3 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। कोर्ट ने जुर्माना लगाने के साथ-साथ उन्हें अपनी गलती सुधारने का निर्देश भी दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना और अन्य लोगों को अनुपालन हलफनामा यानी अदालत का आदेश मानने का लिखित प्रमाण जमा करने के लिए दो हफ्ते का समय दिया है।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा विवाद साल 2025 में यूट्यूब पर आए समय रैना के शो ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ के पहले सीजन से जुड़ा है। इस शो के दो एपिसोड्स में समय रैना और कुछ अन्य कॉमेडियंस ने दृष्टिहीन लोगों और SMA (Spinal Muscular Atrophy) जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों का मजाक उड़ाया था, जिसमें एक छोटा बच्चा भी शामिल था। इस भद्दे मजाक के खिलाफ मशहूर कंटेंट क्रिएटर्स रणवीर इलाहबादिया, आशीष चंचलानी पर ‘क्योर एसएमए फाउंडेशन’ ने कोर्ट में याचिका दायर की थी।
2 हफ्ते में जमा करना होगा जुर्माना
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस जेवी मोहना की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने समय रैना को आदेश दिया है कि उन्हें 2 हफ्ते के अंदर 10 लाख रुपये का जुर्माना जमा करना होगा। अदालत ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर उन्होंने ऐसा नहीं किया, तो उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
वकील ने कहा- “मुझे समझ नहीं आता ये कैसे यूथ आइकन हैं”
सुनवाई के दौरान ‘क्योर एसएमए फाउंडेशन’ की तरफ से पेश हुईं सीनियर वकील अपराजिता सिंह ने कोर्ट को बताया कि समय रैना ने अदालत से जो वादे किए थे, वे पूरे नहीं किए।
उन्होंने कोर्ट में कहा, “समय रैना लगातार अपने शोज कर रहे हैं और पैसे कमा रहे हैं, लेकिन कोर्ट के आदेश के बावजूद उन्होंने अब तक न तो SMA फाउंडेशन से संपर्क किया है और न ही इस बीमारी से पीड़ित किसी व्यक्ति से मिले हैं। मुझे समझ नहीं आता कि वो किस तरह के ‘यूथ आइकन’ हैं। यह सोचकर ही मुझे डर लगता है।”
क्या कहा था माफीनामे में?
विवाद बढ़ने और सुप्रीम कोर्ट से समन मिलने के बाद अक्टूबर 2025 में समय रैना और उनके साथ शो में मौजूद 4 अन्य कॉमेडियंस विपुल गोयल, सोनाली ठक्कर, निशांत तंवर और बलराज घई ने मिलकर एक साझा माफीनामा जारी किया था। उन्होंने अपने बयान में कहा था कि “हमारे शो से जिसे भी ठेस पहुंची है, हम उसके लिए गहराई से माफी मांगते हैं। आगे से हम इस बात का ध्यान रखेंगे और इस समुदाय की चुनौतियों के प्रति जागरूकता फैलाने की पूरी कोशिश करेंगे।”
हालांकि, कोर्ट ने पाया कि ये बातें सिर्फ कागजों तक ही सीमित रहीं और असल में रैना ने अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई।
विकलांगों का मजाक उड़ाने पर बन सकता है सख्त कानून?
इस सुनवाई के दौरान एक अहम बात यह भी निकलकर सामने आई कि चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने विकलांग व्यक्तियों के खिलाफ किए जाने वाले भद्दे और अपमानजनक जोक्स को लेकर चिंता जाहिर की।
उन्होंने सॉलिसिटर जनरल से सवाल किया कि, “क्यों न SC/ST एक्ट की तर्ज पर एक सख्त कानून बनाने पर विचार किया जाए, जिसमें विकलांग लोगों का अपमान करने वालों के लिए सजा का साफ प्रावधान हो?” इस पर सॉलिसिटर जनरल ने भी सहमति जताते हुए कहा कि किसी के सम्मान को ठेस पहुंचाकर कभी भी कॉमेडी नहीं की जानी चाहिए।
अब समय रैना और उनके साथियों को अगले 14 दिनों के अंदर अदालत को यह लिखित में बताना होगा कि उन्होंने कोर्ट के पुराने आदेशों का पूरी तरह से पालन कर लिया है। यह मामला साफ तौर पर दिखाता है कि अदालत के आदेशों की अनदेखी करना किसी को भी भारी पड़ सकता है, चाहे वह कोई भी हो।
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