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सबरीमला मंदिर के तंत्री कंतारार राजीवरु की गिरफ्तारी पर केरल में सियासी घमासान आरंभ हो गया है. विपक्ष ने हाईकोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की है, जबकि पी राजीव ने साजिश के आरोप को खारिज कर दिया है. एसआईटी ने पहले बेल के खिलाफ हाईकोर्ट जाने का मन बनाया था. लेकिन अब यह फैसला टाल दिया गया है.
सबरीमला मंदिर के तंत्री को विजिलेंस कोर्ट से जमानत मिल गई है. (फाइल फोटो)
तिरुवनंतपुरम. केरल में सबरीमला मंदिर के तंत्री की गिरफ्तारी पर भारी बवाल मच गया है. तंत्री को कथित सोना चोरी मामले में अरेस्ट किया गया था. अब इस मुद्दे पर केरल में तगड़ा सियासी घमासान छिड़ गया है. लेफ्ट सरकार पर गंभीर साजिश के आरोप लग रहे हैं. हालांकि कानून मंत्री पी राजीव ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. दूसरी तरफ विपक्ष ने हाईकोर्ट की निगरानी में जांच की मांग उठा दी है. तंत्री 40 दिन तक जेल में रहे हैं. इस मामले ने विजयन सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं.
सरकार का इनकार, एसआईटी ने की निष्पक्ष जांच
कानून मंत्री पी राजीव ने साजिश के दावों को गलत बताया है. पी राजीव ने कहा, ‘सरकार ने एसआईटी की जांच में कोई दखल नहीं दिया है’. उन्होंने साफ किया कि यह अरेस्ट पुख्ता सबूतों के आधार पर ही हुआ था. यह पूरा विवाद तंत्री कंतारार राजीवरु की गिरफ्तारी के बाद भड़का है.
तंत्री का बड़ा आरोप, महिलाओं की एंट्री का किया था विरोध
तंत्री राजीवरु ने अपनी बेल पिटीशन में बड़े आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि यह अरेस्ट सत्तारूढ़ दल की नाराजगी का नतीजा है. तंत्री ने सबरीमला में महिलाओं की एंट्री का कड़ा विरोध किया था. इसी वजह से उन्हें फंसाया गया है. कोल्लम विजिलेंस कोर्ट ने उन्हें हाल ही में जमानत दी है. कोर्ट ने कहा कि चोरी से उनका सीधा कनेक्शन साबित करने वाले सबूत नहीं मिले हैं.
विपक्ष का हल्ला बोल, हाईकोर्ट की निगरानी में हो जांच
विपक्ष के नेता वीडी सतीशन ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. विपक्ष ने एसआईटी से पब्लिक में सफाई मांगी है. तंत्री पर आखिर कौन सा सटीक अपराध लगाया गया था. क्या यह सीपीआई (एम) के खिलाफ उठे आरोपों से ध्यान भटकाने की चाल थी. विपक्ष ने सोशल मीडिया पोस्ट्स का भी हवाला दिया. कुछ समर्थकों ने इसे सीएम की उपलब्धि बताया था.
विपक्ष ने 11 जनवरी को ही इस मामले में कड़ा स्टैंड लिया था. विपक्ष ने कहा, ‘अगर उन्होंने गलत किया है तो वे जेल में रहें, लेकिन जनता को सच पता होना चाहिए’. एसआईटी ने पहले बेल के खिलाफ हाईकोर्ट जाने का मन बनाया था. लेकिन अब यह फैसला टाल दिया गया है. सरकार नहीं चाहती कि उस पर तंत्री को टारगेट करने का आरोप लगे.
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राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें
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