RSS प्रमुख मोहन भागवत मंगलवार को न्यूयॉर्क पहुंचे। यह उनके तीन देशों के दौरे का पहला पड़ाव है। वह अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन जाएंगे। यह दौरा RSS के शताब्दी वर्ष के मौके पर हो रहा है। उन्हें विदेशों में मौजूद भारतीय समुदाय के संगठनों ने आमंत्रित किया है। न्यूयॉर्क पहुंचने पर मोहन भागवत का तिलक लगाकर स्वागत किया गया। दौरे के दौरान वह भारतीय मूल के लोगों और स्थानीय संगठनों के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे। RSS के मुताबिक, संगठन के 100 साल पूरे होने के मौके पर विदेशों में कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। मैडिसन स्क्वायर गार्डन में कार्यक्रम मोहन भागवत शनिवार को न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ कार्यक्रम में शामिल होंगे। इसका आयोजन अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग (AHEAD) फोरम कर रहा है। कार्यक्रम में भारतीय समुदाय के बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। यह कार्यक्रम रक्षाबंधन के मौके पर आयोजित किया जा रहा है। इसमें एकता, नागरिक जिम्मेदारी और वैश्विक सद्भाव का संदेश दिया जाएगा। कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी होंगी और अलग-अलग धर्मों से जुड़े प्रमुख वक्ता शामिल होंगे। 25 अगस्त से शुरू हुआ तीन देशों का दौरा RSS के प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने बताया था कि मोहन भागवत 25 अगस्त से अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन के दौरे पर रहेंगे। यह दौरा विदेशों में मौजूद स्थानीय संगठनों और संस्थाओं के निमंत्रण पर हो रहा है। दौरे का समय RSS के शताब्दी वर्ष से भी जुड़ा है। RSS पर USCIRF की टिप्पणी से विवाद भागवत के दौरे से पहले RSS को लेकर अमेरिका की अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) की टिप्पणियों पर भारत ने आपत्ति जताई थी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने USCIRF को ‘पक्षपाती संस्था’ बताया था। उन्होंने कहा था कि आयोग भारत को लेकर बार-बार गलत और भड़काऊ बयान देता रहा है। USCIRF ने भारत में धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर चिंता जताते हुए RSS समेत कुछ संगठनों और लोगों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। भारत ने आयोग की रिपोर्ट को ‘पक्षपातपूर्ण और चुनिंदा तथ्यों पर आधारित’ बताते हुए खारिज कर दिया था।
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