आसमान के ‘बाहुबली’ के आगे बड़े-बड़े हवाई जहाज फेल हो जाएंगे. इसने अलास्का से ऑस्ट्रेलिया तक की 13,560 किलोमीटर की दूरी बिना खाए-पिए और बिना रुके पूरा किया है. इसे ट्रैक करने वाले वैज्ञानिक भी इसके कारनामे से हैरान हैं. ये ‘बार-टेल्ड गॉडविट’ (Bar-tailed godwit) प्रजाति का है. ये केवल 4 महीने का है. इसने आसमान में लगातार 11 दिनों तक उड़ान भरने का रिकॉर्ड बनाया है.
इस चिड़िया ने 11 घंटे में तय किया है 1300 किलोमीटर का रास्ता. (सोशल मीडिया)
यह चमत्कारी पक्षी बार-टेल्ड गॉडविट (Bar-tailed godwit) प्रजाति का है. यह अपने लंबे प्रवासी सफर के लिए दुनियाभर में मशहूर है. जब इसने यह वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया (साल 2022 में), तब इसकी उम्र महज चार महीने थी. यूएस जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) ने इस पक्षी पर एक सैटेलाइट टैग लगाया था, जिसके जरिए इस ऐतिहासिक उड़ान को ट्रैक किया गया.
55 की रफ्तार से समंदर का तय किया रास्ता
आमतौर पर यह प्रजाति आर्कटिक क्षेत्रों (अलास्का और साइबेरिया) में प्रजनन करती है और सर्दियों में न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया का रुख करती है. अलास्का से न्यूजीलैंड का इनका आम रास्ता करीब 11,000 किलोमीटर का होता है, जिसे ये बिना रुके 9 दिन में पूरा करते हैं. लेकिन B6 ने प्रशांत महासागर के ऊपर से 13,560 किलोमीटर उड़कर जानवरों की दुनिया का सबसे बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया. उड़ान के दौरान इनकी रफ्तार 55 किलोमीटर प्रति घंटे से भी ज्यादा होती है.
शरीर के अंगों को कर लिया छोटा
प्रशांत महासागर के ऊपर से गुजरते हुए इस पक्षी के पास न तो आराम करने के लिए कोई जमीन थी और न ही खाने-पीने का कोई साधन. इस ‘सुपर-मैराथन’ के लिए B6 ने अलास्का में जमकर दावत उड़ाई और इतना खाया कि इसका आधा वजन केवल चर्बी (Fat) का हो गया. उड़ान के दौरान वजन कम करने और ऊर्जा बचाने के लिए इस पक्षी ने अपने शरीर के अंदरूनी अंगों (जैसे पेट और लिवर) को सिकोड़ कर छोटा कर लिया. यह अनोखी तरकीब उसे जमा की गई चर्बी को कुशलता से बर्न करने में मदद करती है.
आंखों में फिट है GPS
इतने विशाल महासागर के ऊपर जहां कोई रास्ता नहीं होता, वहां भटके बिना सीधा तस्मानिया कैसे पहुंचा जा सकता है? इसका जवाब है पक्षी का इन-बिल्ट नेविगेशन सिस्टम! B6 ने धरती के चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic field) को एक प्राकृतिक कंपास की तरह इस्तेमाल किया. इसकी आंखों में ‘क्रिप्टोक्रोम’ (Cryptochromes) नाम के खास प्रोटीन होते हैं, जो इन चुंबकीय क्षेत्रों को भांप लेते हैं. इसके अलावा ये पक्षी तारों, सूरज की स्थिति और यहां तक कि गंध का भी इस्तेमाल नेविगेट करने के लिए करते हैं.
उड़ते-उड़ते ही पूरी की नींद
सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि 11 दिनों तक बिना रुके यह पक्षी सोया कैसे? दरअसल, ये हवा में उड़ते हुए ही अपनी नींद पूरी कर लेते हैं. इसे ‘यूनिहेमिस्फेरिक स्लीप’ (Unihemispheric sleep) कहा जाता है. इस प्रक्रिया में पक्षी के दिमाग का आधा हिस्सा सो जाता है, जबकि दूसरा हिस्सा उड़ने के लिए पूरी तरह अलर्ट रहता है यानी सीधे शब्दों में कहें तो ‘एक आंख खोलकर सोना’. ऊर्जा बचाने के लिए ये इलाके के हिसाब से अपनी ऊंचाई भी बदलते रहते हैं; गर्म रेगिस्तानों के ऊपर ये ऊंचाई पर उड़ते हैं ताकि ठंडे रहें, और पानी के ऊपर हवा के बहाव का फायदा उठाने के लिए नीचे उड़ते हैं.
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दीप राज दीपक 2022 में न्यूज़18 से जुड़े. वर्तमान में होम पेज पर कार्यरत. राजनीति और समसामयिक मामलों, सामाजिक, विज्ञान, शोध और वायरल खबरों में रुचि. क्रिकेट और मनोरंजन जगत की खबरों में भी दिलचस्पी. बनारस हिंदू व…और पढ़ें
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