Indian Navy: ईरान वॉर की वजह से ग्लोबल सिस्टम की नींव हिल गई है. अमेरिका और इजरायल की अगुआई में ईरान के खिलाफ छेड़े गए युद्ध की वजह से एनर्जी सेक्टर पर गंभीर प्रभाव पड़ा है. खासकर होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से पेट्रोलियम उत्पादों के साथ ही गैस का सप्लाई चेन पर काफी असर पड़ा है.
भारतीय नौसेना इन दिनों अमेरिका के गुआम एयरबेस पर एंटी सबमरीन वॉरफेयर एक्सरसाइज में हिस्सा ले रही है. (फोट: इंडियन नेवी के फेसबुक अकाउंट से साभार)
जानकारी के अनुसार, गुआम स्थित एंडरसन एयरफोर्स बेस में मार्च में आयोजित हो रहे बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास Exercise Sea Dragon 2026 में भारतीय नौसेना समेत कई मित्र देशों की सेनाएं हिस्सा ले रही हैं. अमेरिका की अगुवाई में होने वाला यह अभ्यास मुख्य रूप से पनडुब्बी रोधी युद्ध (Anti-Submarine Warfare) क्षमताओं को मजबूत करने और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है. इस मल्टीनेशनल एक्सरसाइज में इंडियन नेवी के अलावा अमेरिका की नौसेना, रॉयल ऑस्ट्रेलियन एयर फोर्स (RAAF), जापान मैरीटाइम सेल्फ-डिफेंस फोर्स और रॉयल न्यूजीलैंड एयरफोर्स की टीमें भी शामिल हैं. भाग लेने वाले देशों का लक्ष्य समुद्री सुरक्षा को मजबूत करना, आपसी तालमेल बढ़ाना और क्षेत्र में पनडुब्बी रोधी अभियान चलाने की सामूहिक क्षमता को बेहतर बनाना है.
गुआम एयरबेस उस जगह से तकरीबन 7000 किलोमीटर दूर है, जहां अमेरिकी सबमरीन ने ईरानी वॉरशिप IRIS Dena को तबाह किया था. (फाइल फोटो/Reuters)
अल्ट्रा मॉडर्न सिस्टम
ऑस्ट्रेलिया के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, रॉयल ऑस्ट्रेलियन एयर फोर्स ने इस अभ्यास में हिस्सा लेने के लिए अपने अत्याधुनिक P-8A Poseidon समुद्री गश्ती विमान के साथ लगभग 50 एविएटर्स को गुआम भेजा है. यह मल्टीरोल मिशन एयरक्राफ्ट लंबी दूरी की समुद्री निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाने और पनडुब्बियों की पहचान करने जैसे अभियानों के लिए जाना जाता है. करीब दो सप्ताह तक चलने वाले इस अभ्यास में भाग लेने वाले देशों के विमान चालक दल विभिन्न जटिल प्रशिक्षण अभियानों में हिस्सा लेंगे. इन अभियानों के दौरान उन्हें चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में सबमरीन टार्गेट का पता लगाने, उनका पीछा करने और जवाबी कार्रवाई करने की क्षमता का अभ्यास कराया जाएगा. प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य मिशन की गति, सटीकता और बहुराष्ट्रीय टीमों के बीच समन्वय को बेहतर बनाना है. एक्सरसाइज का प्रारूप प्रतिस्पर्धात्मक भी रखा गया है, ताकि भाग लेने वाले देशों के वायुसेना और नौसेना के दल अपनी रणनीतियों को और बेहतर बना सकें. इससे अलग-अलग देशों की सेनाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी यानी संयुक्त रूप से काम करने की क्षमता भी मजबूत होगी.
ऑपरेशनल कैपेबिलिटी
Exercise Sea Dragon 2026 के डिटैचमेंट कमांडर और स्क्वाड्रन लीडर ब्राइस मार्टिन ने कहा कि यह अभ्यास ऑस्ट्रेलियाई वायुसेना के लिए अपनी अपनी ऑपरेशनल कैपेबिलिटी को मजबूत करने और क्षेत्रीय साझेदारों के साथ रिश्तों को और गहरा करने का महत्वपूर्ण अवसर है. उन्होंने कहा कि गुआम के पास फैला विशाल समुद्री प्रशिक्षण क्षेत्र पायलटों को जटिल परिस्थितियों में अभ्यास करने और सहयोगी देशों के साथ बेहतर तालमेल विकसित करने का मौका देता है. उन्होंने कहा, ‘Exercise Sea Dragon 26 हमारे स्किल को निखारने और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ सहयोग मजबूत करने का उत्कृष्ट अवसर है. यहां उपलब्ध विशाल समुद्री क्षेत्र हमें जटिल अभियानों का अभ्यास करने और सहयोगी देशों के साथ समन्वय को और बेहतर बनाने में मदद करता है.’ विशेषज्ञों के अनुसार, आधुनिक नौसैनिक रणनीति में पनडुब्बियों की भूमिका लगातार बढ़ती जा रही है. ऐसे में पनडुब्बी रोधी युद्धाभ्यास किसी भी नौसेना के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो गया है. Sea Dragon जैसे बहुराष्ट्रीय अभ्यास न केवल तकनीकी क्षमता को बेहतर बनाते हैं, बल्कि समुद्री सुरक्षा से जुड़े साझा खतरों से निपटने के लिए देशों के बीच विश्वास और सहयोग भी बढ़ाते हैं.
P-8A Poseidon
इस अभ्यास में ऑस्ट्रेलिया के P-8A Poseidon विमानों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है. ऑस्ट्रेलिया के पास फिलहाल ऐसे 13 अत्याधुनिक समुद्री गश्ती विमान हैं, जिनका उपयोग लंबी दूरी की निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाने और समुद्री सुरक्षा अभियानों में किया जाता है. ये विमान उन्नत सेंसर और संचार प्रणालियों से लैस हैं, जो विशाल समुद्री क्षेत्रों में पनडुब्बियों और सतही जहाजों का पता लगाने में सक्षम हैं. रक्षा अधिकारियों के अनुसार, गुआम में तैनात विमान और कर्मी अभ्यास के दौरान अन्य देशों की सेनाओं के साथ मिलकर काम करेंगे. इससे भाग लेने वाले देशों के बीच संचालन समन्वय और सामरिक समझ को और मजबूती मिलेगी. Sea Dragon 2026 हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती सामरिक चुनौतियों के बीच सहयोगी देशों की सामूहिक सुरक्षा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है. इस तरह के संयुक्त सैन्य अभ्यास क्षेत्र के प्रमुख समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और स्थिरता बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं.
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बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से प्रारंभिक के साथ उच्च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें
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